आखिर क्या हुआ था उस रात जब मुमताज महल ने शाहजहां की गोद में तोड़ा दम

करीब 30 घंटे के लंबे संघर्ष के बाद आधी रात को मुमताज ने अपनी चौदहवीं संतान, बेटी गौहर आरा, को जन्म दिया। लेकिन प्रसव के बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

मोहब्बत जब इतिहास के पन्नों पर अपनी सबसे खूबसूरत इबारत लिखती है, तो उसका नाम मुमताज और शाहजहां बन जाता है। ये इतिहास गवाह है कि हिंदुस्तान के तख्त पर बैठे मुगल बादशाह शाहजहां की दुनिया में दौलत, ताकत और शानो-शौकत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसके दिल का सबसे अनमोल खजाना मुमताज थी। वह उसकी हमराज थी, उसकी सलाहकार थी और उसके जीवन का सबसे अहम हिस्सा भी।

Shahjahan Mumtaz

17 जून 1631 को मुमताज महल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था (AI Image)

कहा जाता है कि मुमताज के बिना शाहजहां का एक दिन भी अधूरा सा लगता था। दोनों के बीच का प्रेम सत्ता और वैभव से कहीं ऊपर था। लेकिन नियति ने शायद इस प्रेम की मियाद बहुत कम लिखी थी। 17 जून 1631 को शाहजहां के चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय मुमताज ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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