Shortest Ghazal: 18 शब्द और 9 खड़ी पाई, पढ़ें दुनिया की सबसे छोटी गजल, शुरू होते ही हो जाएगी खत्म

World's Shortest Ghazal (सबसे छोटी गजल): गजल का अर्थ होता है कविता की वह विधा जिसमें आमतौर पर हुस्न और इश्क़, मिलन और विरह, शराब और शबाब, निराशा और हताशा और सूफ़ीवाद और अध्यात्म आदि की बातें कही जाएं। लेकिन ग़ज़ल किसी दायरे में बंधी नहीं रही। अब उसमें हर प्रकार के विषय और समस्याएं रची जाती हैं।

World's Shortest Ghazal: गज़ल पढ़ना, लिखना और सुनना..सालों से ये सिलसिला यूं ही चला आ रहा है। गज़लों की दुनिया में एक से बढ़कर एक फनकार हुए। गजल का अर्थ होता है कविता की वह विधा जिसमें आमतौर पर हुस्न और इश्क़, मिलन और विरह, शराब और शबाब, निराशा और हताशा और सूफ़ीवाद और अध्यात्म आदि की बातें कही जाएं। लेकिन ग़ज़ल किसी दायरे में बंधी नहीं रही। अब उसमें हर प्रकार के विषय और समस्याएं रची जाती हैं। ग़ज़ल हर बहर में कही जाती है। मोहब्बत के एहसास से जिंदगी के सबक तक, इश्क में जुदाई से दिल के दर्द तक हर तरह के जज्बात को गज़लों की शक्ल मिल चुकी है। चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है और होश वालों को खबर क्या जैसे कुछ गज़ल तो मोहब्बत का तराना बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे छोटी गजल कौन सी है औऱ किसने लिखी है।

Shortest Ghazal

दुनिया की सबसे छोटी गजल

गजल का हर शेर सामान्यतः अलग प्रकार के विषय का रखने वाला होता है। उसका पहला शेर मतला कहलाता है जिसके दोनों मिसरे हम-रदीफ़ और हम-क़ाफ़िया होते हैं। बाक़ी शेरों के मिसरा-ए-सानी अर्थात दूसरे मिसरे में क़ाफ़िया होता है। अंतिम शेर में जिसमें शायर का तख़ल्लुस अर्थात उपनाम हो मक़ता कहलाता है। गजल के सबसे बढ़िया शेर को शाह बैत कहते हैं।

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