Womens Day 2024: महिला दिवस पर पढ़ें भारतीय महिलाओं के जोश और जुनून को बयां करती ये किताबें

Books to Read on Indian Women Achievers: इस बार महिला दिवस (Womens Day) आप भी खास बना सकते हैं। हम आपको कुछ किताबें बता रहे हैं जिसे पढ़कर आप आधी आबादी के साहस और समर्पण को सलाम कर सकते हैं।

International Womens Day 2024: 8 मार्च को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया (International Womens Day) जाता है। इस खास दिन (Mahila Diwas 2024) पर पूरे विश्व में महिलाओं के योगदान और उनके जोश-ओ-जुनून के किस्सों को याद किया जाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से इंटरनेशनल वीमेंस डे (Womens Day 2024) मनाया जाता है। कुछ जगहों पर इस खास दिन दफ्तरों में छुट्टी भी होती है। इस बार महिला दिवस (Womens Day) आप भी खास बना सकते हैं। हम आपको कुछ किताबें बता रहे हैं जिसे पढ़कर आप आधी आबादी के साहस और समर्पण को सलाम कर सकते हैं।

Womens Day Read Books

Best Books For Womens Day 2024

Best Books on Indian Women Achievers

भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों पर कई किताबें लिखी गई हैं। इनमें से कुछ तो ऑटोबायोग्राफी भी हैं। अगर आप भी इस महिला दिवस पर भारतीय महिलाओं पर बेस्ड कुछ अच्छी किताबें पढ़ना चाहते हैं हम आपको नीचे कुछ सुझाव दे रहे हैं। इन किताबों को आप पढ़ सकते हैं:

'Fire on the Mountain' by Anita Desai

इस किताब की कहानी विधवा नंदा कौल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने बच्चों को व्यस्त दुनिया में छोड़ देती है और अपने जीवन के आखिरी कुछ साल कसौली की पहाड़ियों में कैरिग्नानो नाम के एक एकांत बंगले में अकेले बिताने का विकल्प चुनती है। कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब उसकी परपोती राका वहां पहुंचती है। यह किताब 1977 में बुकर प्राइज के लिए नॉमिनेटेड लेखिका अनिता देसाई द्वारा लिखी गई है। इसे साल 1978 का साहित्य अकादमी पुरस्कार भी दिया गया था।

Indian Lives – Kamaladevi Chattopadhyay : The Art of Freedom

यह किताब महात्मा गांधी के साथ आजादी के आंदोलन में भागीदारी निभा चुकीं कमलादेवी चट्टोपाध्याय की दूरदर्शिता और अदम्य साहस पर बेस्ड है। 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद जो सबसे बड़ी समस्या आई वो थी दिल्ली में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की बेतहाशा भीड़। बिना किसी आधिकारिक सरकारी पद के कमादेवी ने हजारों की संख्या में आए रिफ्यूजियों के लिए देश की राजधानी दिल्ली के पास ही पूरा शहर बसा दिया। आज ये शहर फरीदाबाद के नाम से जाना जाता है। इस किताब में दिखाया गया है कि कैसे अगर हम कुछ ठान लें तो उसे मुमकिन किया जा सकता है।

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