Overthinking In Women Health Impact: हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की ताकत, संघर्ष और योगदान को सम्मान देने का दिन है। लेकिन इसके साथ एक सच्चाई यह भी है कि महिलाएं अक्सर अपने परिवार, रिश्तों और जिम्मेदारियों के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचती रहती हैं। कई बार यही आदत धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग में बदल जाती है और मानसिक ही नहीं, शारीरिक सेहत पर भी असर डालने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा सोचने की आदत से तनाव, नींद की कमी और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स पैदा हो सकती हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि महिलाएं ज्यादा क्यों सोचती हैं और इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने बात की डॉ. मीनाक्षी जैन से, जो अमृता अस्पताल सायकायट्रिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर हैं। चलिए डॉक्टर से ही जानते हैं, महिलाओं के साथ ओवरथिंकिंग की समस्या क्यों होती है।
महिलाएं ज्यादा क्यों सोचती हैं?
डॉ मीनाक्षी जैन बताती हैं कि महिलाओं का दिमाग भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील होता है। वे रिश्तों, परिवार और भविष्य से जुड़ी बातों को गहराई से सोचती हैं। यही वजह है कि कई बार छोटी-छोटी बातें भी उनके दिमाग में लंबे समय तक घूमती रहती हैं।
इसके अलावा महिलाओं पर अक्सर कई जिम्मेदारियां एक साथ होती हैं - घर, काम, बच्चों की देखभाल और रिश्तों को संभालना। इन सबके बीच दिमाग लगातार सक्रिय रहता है। यही वजह है कि कई बार वे हर परिस्थिति के अलग-अलग नतीजों के बारे में सोचने लगती हैं, जिसे ओवरथिंकिंग कहा जाता है।
ज्यादा सोचने की क्या क्या हो सकती है वजह
हार्मोनल बदलाव भी निभाते हैं भूमिका
महिलाओं के शरीर में समय-समय पर हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे चरणों में हार्मोन का संतुलन बदलता है। डॉ. मीनाक्षी जैन के अनुसार, इन बदलावों के कारण मूड स्विंग, चिंता और भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। यही वजह है कि कई बार महिलाएं किसी स्थिति को लेकर ज्यादा सोचने लगती हैं। अगर यह लंबे समय तक जारी रहे तो मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है।
ज्यादा सोचने से शरीर पर क्या असर पड़ता है
कई लोगों को लगता है कि ज्यादा सोचने से सिर्फ दिमाग थकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। डॉ. जैन बताती हैं कि जब कोई व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है तो शरीर में कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। यह हार्मोन लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में रहें तो कई शारीरिक समस्याएं शुरू हो सकती हैं। ज्यादा सोचने की वजह से अक्सर ये समस्याएं देखने को मिलती हैं:
- बार-बार सिरदर्द होना
- नींद ठीक से न आना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- पेट से जुड़ी दिक्कतें
- ब्लड प्रेशर बढ़ना
ज्यादा सोचना कैसे बना रहा बीमार
ओवरथिंकिंग के कुछ आम संकेत
कई बार लोगों को खुद पता नहीं चलता कि वे जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो इस समस्या की तरफ इशारा करते हैं जैसे -
- किसी बात को बार-बार याद करना
- हर परिस्थिति में सबसे बुरा नतीजा सोच लेना
- छोटी बातों पर भी ज्यादा चिंता करना
- या रात में दिमाग का शांत न हो पाना।
अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहे तो यह मानसिक थकान और चिंता को बढ़ा सकता है।
इस आदत को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है
डॉ. जैन के अनुसार, ओवरथिंकिंग को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ छोटी आदतों से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
- सबसे पहले जरूरी है कि दिमाग को थोड़ा आराम दिया जाए। इसके लिए रोजाना कुछ मिनट मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग करना मददगार हो सकता है।
- इसके अलावा अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय किसी करीबी से बात करना भी मानसिक तनाव को कम कर सकता है।
- संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
महिलाओं में ज्यादा सोचने की आदत कई कारणों से हो सकती है भावनात्मक संवेदनशीलता, जिम्मेदारियों का दबाव और हार्मोनल बदलाव। लेकिन अगर यह आदत बढ़ जाए तो इसका असर मानसिक और शारीरिक दोनों सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसे समझा जाए और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके मानसिक संतुलन बनाए रखा जाए।
Expert View: डॉ. मीनाक्षी जैन अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के मनोचिकित्सक विभाग में सीनियर कंसल्टेंट सायकायट्रिस्ट डॉक्टर हैं। उनके पास इस क्षेत्र में लगभग 20 साल का अनुभव है।
