बिना एसी और कूलर के भी क्यों ठंडे रहते थे पुराने जमाने के घर, जानें क्या था उनका कूलिंग सीक्रेट

गर्मियों में एसी या कूलर के बिना हमारे घरों में रहना मुश्किल हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराने जमाने के घर नेचुरली काफी हद तक ठंडे रहते थे। आइए जानते हैं क्या था उनका कूलिंग सीक्रेट?

Natural Cooling Techniques: आज जब गर्मियों में एसी और कूलर के बिना रहना मुश्किल लगता है, तब यह सवाल अक्सर मन में आता है कि आखिर हमारे दादा-नाना के जमाने में लोग भीषण गर्मी में कैसे आराम से रहते थे। उस समय न हर घर में बिजली थी और न ही एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं। इसके बावजूद पुराने घरों का तापमान आज की अपेक्षा काफी ठंडा रहता था। इसकी वजह कोई जादू नहीं, बल्कि पारंपरिक वास्तुकला (Sustainable House Design) और प्रकृति के अनुरूप बनाई गई निर्माण शैली थी। जी हां पुराने घरों का निर्माण कुछ इस तरह किया जाता था कि वह नेचुरली गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहा करते थे। आइए विस्तार से जानते हैं पुराने घरों की कूलिंग का राज...

Natural Cooling Techniques

ठंडे क्यों रहते थे पुराने घर

मोटी दीवारें

पुराने घरों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मोटी दीवारें होती थीं। ईंट, पत्थर, मिट्टी और चूने से बनी ये दीवारें बाहर की गर्मी को तुरंत अंदर नहीं आने देती थीं। दिनभर की गर्मी को ये दीवारें खुद में समा लेती थीं, जिससे घर का अंदरूनी हिस्सा काफी ठंडा बना रहता था। यही वहज थी कि दोपहर की तेज धूप में भी ऐसे घरों में सुकून महसूस होता था।

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