Dowry Deaths in India: नोएडा की दो लड़कियां, ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma Case) और दीपिका नागर। शादी के बाद दोनों ने ही बड़े अरमानों से नई दुनिया में कदम रखा था। नए सपनों की पोटली बांध जब बाबुल के आंगन से विदा हुईं तो घरवालों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि दोनों कफन में लिपटी लौटेंगी। दोनों की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एक फांसी के फंदे पर झूलती मिली तो दूसरी छत से गिरकर मृत पाई गई। दोनों ही घटनाएं किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर करारा तमाचा हैं।
आत्मसम्मान से सौदा ना करें लड़कियां, दहेज के खिलाफ बुलंद करें आवाज (AI Image)
नोएडा की ये दोनों लड़कियां आज उन लाखों बेटियों के दर्द का नाम बन चुकी हैं जो शादी के बाद अपने ही ससुराल में घुट-घुटकर जीती हैं और फिर एक दिन मर जाती हैं या मार दी जाती हैं। दोनों ही मामलों में ऐसी बात सामने आई है कि दहेज के लालच ने दोनों बेटियों से उनकी सांसे छीन लीं।
दरअलसल बेटी की शादी दुनिया के किसी भी मां-बाप के लिए जिंदगी का सबसे भावुक पल होता है। जिस बच्ची को उन्होंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसकी विदाई के दिन आंखों में खुशी से ज्यादा चिंता और डर होता है। लेकिन सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है, जब इस विदाई के साथ दहेज का बोझ भी जुड़ जाता है।
एक पिता अपनी पूरी जिंदगी की कमाई बेटी की मुस्कान के लिए जोड़ता है। कोई अपनी जमीन बेच देता है, कोई कर्ज लेता है, तो कोई अपनी जरूरतें मारकर बेटी के लिए दहेज का एक-एक सामान जुटाता है। इस 'रिवाज' को निभाने में अंदर ही अंदर कई मां-बाप टूट रहे होते हैं। वे सिर्फ इसलिए सब सह लेते हैं ताकि उनकी बेटी शादी के बाद खुश रह सके।
घरवाले दहेज देकर शादी करें तो क्या करें बेटियां
असल में, बेटी को दहेज नहीं, सम्मान और विश्वास देकर विदा किया जाना चाहिए। उसे इस बात का भरोसा देना चाहिए कि बेटी तू भले घर से विदा हो रही है लेकिन तेरे मां-बाप हमेशा तेरे साथ ही खड़े दिखेंगे। उसे सिखाएं कि ससुराल को संवारने में अपने सम्मान से समझौता मत कर लेना। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर मां-बाप दहेज देकर शादी कर रहे हों, तो उस बेटी को क्या करना चाहिए? क्या उसे चुप रहना चाहिए या अपनी बात रखनी चाहिए?
माता-पिता की कमजोरी नहीं ताकत बनें
कई लड़कियां यह सोचकर चुप रह जाती हैं कि अगर उन्होंने विरोध किया तो माता-पिता की बदनामी होगी या रिश्ता टूट जाएगा। लेकिन सच यह है कि एक गलत रिश्ते से बच जाना, जिंदगी भर दुख सहने से बेहतर होता है। अगर लड़की को लगे कि सामने वाला परिवार बार-बार महंगे गिफ्ट, गाड़ी, कैश या दूसरी चीजों की डिमांड कर रहा है, तो उसे अपने माता-पिता से खुलकर बात करनी चाहिए। कई बार मां-बाप समाज के डर से दबाव में आ जाते हैं। ऐसे में बेटी का साहस ही उन्हें सही फैसला लेने की ताकत दे सकता है।
खुद को बोझ ना समझें
हमारे समाज में आज भी कई बेटियां यह सोचकर चुप रहती हैं कि उनके कारण माता-पिता पर बोझ बढ़ रहा है। लेकिन हर बेटी को यह समझना चाहिए कि उसकी जिंदगी किसी गाड़ी, कैश या जूलरी से कहीं ज्यादा कीमती है। वैसे भी शादी कोई सौदा नहीं, सम्मान और बराबरी का रिश्ता होना चाहिए। अगर कोई रिश्ता केवल दहेज के सहारे टिक रहा है, तो वह रिश्ता कभी सच्चा और सुरक्षित नहीं हो सकता।
कानून और अधिकारों की जानकारी रखें
भारत में दहेज लेना और देना दोनों कानूनन अपराध हैं। हर लड़की को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। अगर शादी से पहले या बाद में किसी तरह का मानसिक दबाव, धमकी या दहेज की मांग हो, तो उसे नजरअंदाज ना करे। परिवार, करीबी दोस्तों और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद लें
सबसे जरूरी है आत्मसम्मान
एक लड़की को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि उसका सम्मान किसी भी रिश्ते, सामाजिक दबाव या रीति-रिवाज से बड़ा है। मां-बाप अपनी बेटी की खुशी के लिए सबकुछ कर सकते हैं, लेकिन बेटी का फर्ज भी है कि वह खुद को ऐसे रिश्ते में ना धकेले जहां उसकी कीमत सामान और पैसों में तय की जा रही हो।
बेटियों ने फूंक दिया है बिगुल
अब बेटियां हिम्मत कर भी रही हैं। पिछले कुछ सालों में दहेज मांगने वालों को लड़कियों ने हिम्मत दिखाते हुए खूब सबक सिखाया। कहीं बिना दुल्हन लिये बारात को वापस लौटना पड़ा तो कहीं दहेज के लालची बारातियों की रात थाने में कटी। जो बात किसी भी इंसान को खुद समझ में आनी चाहिए वो बेटियां उन्हें सिखा रही हैं। उन्हें सबक सिखाते हुए बता रही हैं कि जिस लड़की को घर की लक्ष्मी कहते हो उसका सौदा क्यों कर रहे हो।
हमारी बहादुर बेटियों ने सामाजिक बदलाव का बिगुल तो फूंक ही दिया है। जरूरत ये है कि हम भी बतौर परिवार अपनी बेटी के फैसले का सम्मान करें और उसे बताएं कि शर्म वो करे जो दहेज मांगता हो, उनको सबक सिखाया तो शर्म कैसी।
अंत में यही कहेंगे कि असल में शादी वहां होनी चाहिए जहां बेटी को बहू नहीं, इंसान समझा जाए। जहां उसे अपनापन मिले, बराबरी मिले और बिना किसी शर्त के सम्मान मिले। क्योंकि जिस रिश्ते की नींव लालच पर रखी जाती है, वहां खुशियां ज्यादा समय तक टिक नहीं पातीं।
