Silent Divorce: लोग शादी करते हैं, घर बसाते हैं और साथ में सारे गम और खुशियां बांटते हुए जिंदगी का सफर तय करते हैं। लेकिन बहुत से लोगों के शादी के सफर में एक वक्त ऐसा आता है जब चीजें उलझने लगती हैं। साथ चलना तो क्या एक छत के नीचे रहना भी मुश्किल हो जाता है। शादीशुदा जीवन के इस पड़ाव पर महसूस होता है कि रिश्ते को खत्म करने में ही भलाई। ऐसे में तलाक एक विकल्प बन जाता है। तलाक भले आसान ना हो लेकिन जरूरी हो जाता है। यहां यह समझना होगा कि रिश्ते में तलाक का मतलब हार नहीं होता है। यह एक ऐसा साहसिक फैसला होता है जहां दो लोग अपनी खुशी और मानसिक शांति को प्राथमिकता देते हैं। तलाक उन्हें नई शुरुआत का मौका देता है। लेकिन आजकल नए तरह के तलाक का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में तलाक के इस नए ट्रेंड को साइलेंट डिवोर्स कहा जा रहा है।
क्या होता है साइलेंट डिवोर्स (Photo: AI Image)
रिश्तों में दूरी का नया ट्रेंड है साइलेंट डिवोर्स (Photo: Pexels)
क्या होता है साइलेंट डिवोर्स (What is Silent Divorce)
साइलेंट डिवोर्स शादीशुदा जीवन के उस मुश्किल पड़ाव को कहते हैं जब पति पत्नी के बीच किसी भी तरह का भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव ना बचा हो, फिर भी वह एक दूसरे के साथ रिश्ते में रहते हैं। इसे यूं समझा जाए कि साइलेंट डिवोर्स में न प्यार होता है, ना झगड़े होते हैं, ना अपनापन होता है, ना रोमांस और ना ही तलाक की बात। बिना तलाक लिए दोनों रिश्ते को खींच रहे होते हैं। दोनों दुनिया की नजर में पति पत्नी बनकर एक छत के नीचे एक दूसरे के साथ रहते हैं।
साइलेंट डिवोर्स की स्थिति में पार्टनर्स के बीच कोई पर्सनल बातचीत नहीं होती। सिर्फ जरूरी बातें जैसे- दूध लाना है या बिजली का बिल भरना है, जैसी बातें ही होती हैं। यहां एक-दूसरे की जिंदगी के बारे में जानने की कोई जिज्ञासा नहीं होती। साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस होता है। एक-दूसरे को देख कर खुशी या रोमांच महसूस नहीं होता। महसूस होता है तो बस ये कि आप साथ है सिर्फ बच्चों और समाज के लिए।
जब खामोश हो जाए रिश्ता (Photo: Pexels)
क्यों हो रहे साइलेंट डिवोर्स (Reasons of Silent Divorce)
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स साइलेंट डिवोर्स को असल तलाक से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। दरअसल जब इंसान तलाक लेता है तो उसके पास नई शुरुआत का एक मौका होता है, लेकिन साइलेंट डिवोर्स में आप एक मन:स्थिति पर फंसे रहते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इस साइलेंट डिवोर्स की नौबत आती कैसे है:
1. इमोशनल डिस्कनेक्ट: साइलेंट डिवोर्स की नौबत आने का सबसे बड़ा कारण है भावनात्मक दूरी बनना। जब हम ना तो सामने वाले की भावनाओं को समझ पाते हैं और ना ही समझना चाहते हैं तो उस स्थिति में हम धीरे-धीरे अपने पार्टनर से दूर होने लगते हैं। एक वक्त ऐसा आता है जब भावनाओं की डोर पूरी तरह से टूट जाती है।
2. कम्युनिकेशन की कमी: किसी भी रिश्ते की उम्र इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस रिश्ते में कितना संवाद होता है। अगर पति-पत्नी के बीच रोजमर्रा का संवाद खत्म होने लगे तो समझ जाइए कि साइलेंट डिवोर्स का जन्म होने वाला है।
3. समय और सम्मान की कमी: बच्चे, परिवार, नौकरी और दुनियादारी में फंसकर कई बार पति पत्नी एक दूसरे को समय भी नहीं दे पाते। यह बेहद घातक होता है। वहीं रिश्ते में सम्मान की कमी भी कपल्स को साइलेंट डिवोर्स की तरफ ले जा रही है।
4. रोमांस की कमी: रोमांस पति पत्नी के रिश्ते की अहम कड़ी होती है। रोमांस के कम होने से ये कड़ी घिसने लगती है। कुछ समय के बाद ना संबंधों में ना तो रोमांस बचता है और ना ही रिश्तों की वो कड़ी। नतीजा होता है साइलेंट डिवोर्स
5. असमान अपेक्षाएं: कई बार ऐसा होता है कि शादीशुदा जीवन में एक साथी रिश्ते में प्यार, समझदारी या सपोर्ट चाहता है और दूसरा उदासीन रहता है। ऐसी स्थिति में भी रिश्तों की डोर धीरे-धीरे टूटने लगता है।
क्यों हो रहे साइलेंट डिवोर्स (Photo: Pexels)
साइलेंट डिवोर्स से कैसे उबरें (How to get rid of Silent Divorce)
अगर आप साइलेंट डिवोर्स के चंगुल में फंस चुके हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह स्थिति ऐसी नहीं कि इससे बाहर नहीं निकला जा सकता था। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप ये मानें कि स्थिति साइलेंट डिवोर्स की बन चुकी है।
1. स्वीकार करें - सबसे पहले स्वीकार करें कि कुछ गलत है। आपको मानना ही पड़ेगा कि आपका रिश्ता सिर्फ शेल बनकर रह गया है। इस बाबत पार्टनर से बात करें।
2. संवाद करें- पार्टनर से खुलकर बात करें। उन्हें बताएं कि आप क्या महसूस कर रहे हैं। आपसी सहमति से रिश्ते की मई शुरुआत करें।
3. समय दें – अगर पार्टनर बात करने को तैयार नहीं है तो खुद को समझना शुरू करें। खुद की जरूरतों और खुशियों पर ध्यान दें।
4.सपोर्ट लें - यह ऐसी स्थिति है जो आपके लिए अकेले सब झेलना जरूरी नहीं है। अपने भरोसेमंद दोस्तों, परिवार या किसी काउंसलर से बात करें।
5. शौक पूरे करें- शादी के बाद कई लोग अपने शौक छोड़ देते हैं। वह खुद को खो देते हैं। ऐसे में आप अपने पुराने शौक, सपने और दोस्तों को फिर से जियें।
6. फाइनल डिसीजन लें- आपकी कोशिशों के बाद भी अगर रिश्ते को बचाना मुमकिन नहीं लग रहा तो संयम से सोचें कि आगे क्या करना है। अगर आपको लगता है कि तलाक ले लेना चाहिए तो कानूनी तौर पर डिवोर्स लेकर अलग हो जाएं।
साइलेंट डिवोर्स से कैसे बचें (Photo: Pexels)
साइलेंट डिवोर्स से कैसे बचें (Tips to avoid Silent Divorce)
भारत में शादी को सात जन्मों का बंधन माना जाता हैं। यहां पति पत्नी दोनों की जिम्मेदारी होती है कि वह रिश्ते की डोर को संभाल कर रखें। तनातनी इतनी भी ना हो कि यह डोर टूट जाए। इसके लिए जरूर है कि हम ये जानें कि साइलेंट डिवोर्स जैसी स्थिति में फंसने से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए:
1. अपने पार्टनर से खुलकर लेकिन विनम्रता से बात करें। अगर आप कुछ गलत महसूस कर रहे हैं, तो उसे दबाकर न रखें। सिर्फ अपनी बात कहने की बजाय पार्टनर की भावनाएं भी समझें।
2. रिश्ता अगर अपनी चमक खोते जा रहा है तो साथ मिलकर कुछ नया करें। डिनर डेट पर जाएं, कोई ट्रैवल प्लान करें या साथ कुछ और करें।
3. धूमिल पड़ रहे रिश्ते को पुराने समय की हसीन यादों से तरोताजा करें। अपने रिश्ते की शुरुआत, वो मीठे पल, साथ बिताए गए अच्छे समय को फिर से याद करें और उन्हें फिर से जीने की कोशिश करें।
4. आज के समय में मोबाइल और टीवी रिश्ते के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं। जब घर पर रहें को जितना हो सके इससे दूर रहें। क्योंकि जब आप अपने पार्टनर के साथ हों, तो वाकई साथ रहें।
5. अगर आप दोनों को लगता है कि रिश्ते में कुछ दिक्कत है। चीजें सुलझने की जगह उलझती जा रही हैं। ऐसे में आप काउंसलर की मदद लें। कई बार मदद लेना जरूरी हो जाता है।
रिश्ते की खामोशी का टूटना है जरूरी (Photo: Pexels)
एक बात हमेशा याद रखें कि साइलेंट डिवोर्स कानूनी तलाक से ज्यादा खतरनाक होता है। कानूनी तलाक में ये तो स्पष्ट होता है कि रिश्ता खत्म हो चुकै है और इंसान उस उलझन वाली स्थिति से निकल चुका है। लेकिन साइलेंट डिवोर्स में दो लोग एक अधूरे से टूटे हुए रिश्ते में फंसे रहते हैं। सबसे मुश्किल ये है कि इससे बाहर निकलने का रास्ता भी साफ नहीं होता। इसलिए अगर आपके रिश्ते में भी चुप्पी
