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Bonus Mother: सौतेली मां हुआ पुराना, अब आया 'बोनस मॉम' का जमाना; जानें क्या है ये बोनस मदर कल्चर

What is Bonus Mother Culture: भारत में अभी ये उतनी तेजी से पैर नहीं पसार पाया है लेकिन अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों की सोसाइटी में बोनस मदर कल्चर रच बस गया है।

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जन्म नहीं दिया, फिर भी मां कहलाती है, आखिर कौन होती है Bonus Mom? (AI Image)
Authored by: Suneet Singh
Updated Jun 6, 2026, 13:12 IST
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उसको नहीं देखा हमने कभी

पर उसकी जरूरत क्या होगी,

हे मां तेरी सूरत से अलग

भगवान की सूरत क्या होगी..

मशहूर शायर और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी की कलम से निकले ये चंद शब्द ही मां नाम के किरदार को बयां करने के लिए काफी हैं। तभी को कहा जाता है कि ईश्वर हर जगह नहीं पहुंच सकता इसीलिए उसने मां बना दी। मां, जो हर किसी की होती है, हर किसी के पास होती है। कुछ लोगों के पास तो मां बोनस के तौर पर भी होती है। वैसे तो मां मूल रूप से तीन तरह से बच्चों की जिंदगी में शामिल होती है। एक जन्म देने वाली मां, एक पालने वाली मां और एक सौतेली मां। लेकिन पिछले कुछ सालों में बोनस मॉम नाम के किरदार का भी जन्म हुआ है। भारत में अभी ये उतनी तेजी से पैर नहीं पसार पाया है लेकिन अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों की सोसाइटी में बोनस मदर कल्चर रच बस गया है।

कौन होती है बोनस मॉम

आप जब इंटरनेट पर बोनस मदर या बोनस मॉम का मतलब ढूंढेंगे तो ज्यादातर जगह इसकी गलत परिभाषा मिलेगी। ज्यादातर जगहों पर पर यही बताया गया है कि बोनस मॉम वह मां है जिसने उन बच्चों को जन्म नहीं दिया जिन्हें वह पाल रही है, जैसे कि गोद लिए हुए बच्चे। जबकि बोनस मदर का गोद लेने से कोई भी लेना देना नहीं है। कुछ जगहों पर तो बच्चों की देखभाल करने वाली आया, फौस्टर पेरेंट, मौसी, चाची या दादी तक को भी बोनस मॉम बताया है, जो कि सरासर गलत है।

जब हमने इंटरनेट को कायदे से खंगाला तब जाकर हमें बोनस मदर की सही परिभाषा मिली। बोनस मॉम उस महिला के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो अपने पार्टनर (पति या साथी) के साथ रहती है और अपने पार्टनर के बच्चों को पालने में उसकी मदद करती है या कर चुकी है। इसी तरह बोनस डैड की परिभाषा भी यही होगी।

मां की कमी से जूझ रहे बच्चों के लिए 'वरदान' है ये रिश्ता (AI Image)

मां की कमी से जूझ रहे बच्चों के लिए 'वरदान' है ये रिश्ता (AI Image)

क्या होती है बोनस मॉम की जिम्मेदारी

बोनस मॉम बच्चों पर अपना अधिकार नहीं जमाती या उससे जुड़े सारे फैसले अकेले नहीं लेती। वह बच्चों के असली माता-पिता के बनाए नियमों का सम्मान करती है और मिलकर बच्चों की अच्छी परवरिश करने में हाथ बंटाती है। यह रिश्ता पूरी तरह से प्यार और सम्मान पर टिका होता है। इसके लिए शादीशुदा होना भी जरूरी नहीं है, अगर कोई साथ रहकर परिवार की तरह बच्चों को संभाल रहा है, तो वह भी बोनस मॉम है।

आसान शब्दों में समझें तो अगर जब कोई महिला अपने पति की पहली शादी से हुए बच्चों को सगी मां की तरह पालती है तब वह बोनस मदर कहलाती है। अब आप ये सोच रहे होंगे कि इस तरह की मां को तो स्टेप मॉम या सौतेली मां कहा जाता है। फिर ये बोनस मॉम कैसे कहलाने लगीं।

बोनस मदर किसी भी बच्चे के जीवन में प्यार और सहयोग का एक अतिरिक्त जरिया है। उस बच्चे को जन्म देने वाली मां भी है। तलाक के बाद भले वह अलग रह रही हो, लेकिन बच्चों को उसका प्यार मिल रहा है। ऐसे में अपने पिता की दूसरी पत्नी या फिर लिविंग पार्टनर से जब बच्चों को मां जैसा प्यार मिले तो वह उनके लिए बोनस जैसा है। इसी कारण से जन्म ना देकर भी अपने पति के बच्चों को मां जैसा प्यार देने वाली महिलाओं को बोनस मदर कहा गया।

कैसे हुआ Bonus Mother का 'जन्म'

इंटरनेट पर बोनस मदर टर्म का सबसे पुराना रेफरेंस करीब 35 साल पहले मिलता है। तब अमेरिका की सोशल सोसाइटी कई तरह के बगलावों से गुजर रही थी। वहां का समाज बदल रहा था और कई परिवार ऐसे बन रहे थे जहां माता-पिता के अलग होने के बाद नए रिश्ते जुड़ रहे थे। हमेशा से ऐसे रिश्तों के लिए 'स्टेप' शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। जैसे कि स्टेप फादर या स्टेप मदर। भारत में यही स्टेप शब्द सौतेले के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

(फोटो सोर्स- गियर्स आउट यू ट्यूब)

(फोटो सोर्स- गियर्स आउट यू ट्यूब)

उस समय के बदलते समाज को एहसास हुआ कि कुछ शब्दों का असर रिश्तों पर भी पड़ता है। स्टेप मॉम जैसे शब्द बच्चे के मन में शायद अपनेपन की भावना को कभी पनपने ही नहीं देते। उन्हें ये शब्द नकारात्मकता से भरा हुआ लगने लगा। इस कारण उन्होंने स्टेप की जगह बोनस का इस्तेमाल शुरू कर दिया। उनके लिए बोनस का मतलब ये था कि बच्चे की जिंदगी में अतिरिक्त देखभाल करने और प्यार देने वाला ऐसा शख्स शामिल हुआ है, जो उसकी बायोलॉजिकल मां की जगह लेने नहीं बल्कि उसके जीवन को और खुशहाल बनाने आया है।

अमेरिका से निकला बोनस मॉम का ये कॉन्सेप्ट यूरोप समेत दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी पहुंच गया। पिछले तीस सालों में दुनिया की बड़ी आबादी इस बोनस मदर कल्चर को अपना चुकी है।

बोनस मॉम और सौतेली मां में क्या अंतर है?

लोगों का मानना है कि बोनस मॉम बच्चे के जीवन में प्यार बढ़ाने के लिए आती है, किसी की जगह लेने के लिए नहीं। वहीं सौतेली मां को अकसर केवल पिता की पत्नी के रूप में देखा जाता रहा है। और आसान तरीके से कहें तो हर सौतेली मां बोनस मॉम बन सकती है, लेकिन कोई बोनस मॉम केवल सौतेली मां तक ही सीमित नहीं होती। यह पारंपरिक पदों से ऊपर उठकर भावनात्मक रिश्ते को अहमियत देती है।

सौतेली मां से कितनी अलग हैं बोनस मॉम्स

सौतेली मां से कितनी अलग हैं बोनस मॉम्स

बोनस मॉम होने के फायदे

किसी बच्चे के लिए बोनस मॉम बनने या किसी बच्चे को बोनम मॉम मिलने के कई फायदे हैं। बोनस मॉम बच्चों को एक्स्ट्रा सपोर्ट और प्यार दे सकती है। वह बच्चों को सही रास्ता दिखा सकती है और उनके जीवन में एक और प्यार करने वाले बड़े इंसान की भूमिका निभा सकती है।

एक शोध के अनुसार, लगभग 48% टीनेजर्स माता-पिता के अलावा किसी अन्य बड़े व्यक्ति से सलाह लेना पसंद करते हैं। ऐसे में वे अपनी समस्याओं के लिए बोनस मॉम के पास आसानी से जा सकते हैं। इसके अलावा, जिन बच्चों के जीवन में मां का साया नहीं होता, उनके लिए परिवार में बोनस मॉम का होना बहुत मददगार साबित होता है।

दूसरी ओर, लगभग 19 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं जो अपनी मां की अनुपस्थिति का अनुभव करते हैं। मां की अनुपस्थिति ऐसे बच्चों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। तमाम स्टडीज बताती हैं कि जिन बच्चों की मां उनके जीवन में मौजूद नहीं होती, वे कई मामलों में दूसरों से अधिक कठिनाइयों का सामना करते हैं, खासतौर से पढ़ाई में। ऐसे में बोनस मॉम उसके जीवन को आसान बना देती है।

कैसे बनें एक बेहतर बोनस मॉम

अगर आप किसी बच्चे के लिए सौतेली नहीं बोनस मॉम बनना चाहती हैं तो इस रिश्ते की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले बच्चे की हर बात सुनें। उसे समझें। उसकी फीलिंग्स का सम्मान करें। उससे जितना हो सके बात करें। जब आप बच्चों की बातों को गंभीरता से सुनते हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि उनकी फीलिंग्स की कद्र की जा रही है।

इस रिश्ते में सहानुभूति बहुत जरूरी है। खुद को बच्चे की जगह रखकर सोचें और समझें कि वह अपने जीवन में कितने बड़े बदलावों से गुजर रहा है। उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और उसे यह एहसास दिलाएं कि उसकी परेशानियों को आप समझ सकती हैं।

साथ ही, प्यार और सम्मान के साथ कुछ स्पष्ट सीमाएं तय करना भी जरूरी है। बच्चों को मार्गदर्शन दें, लेकिन उनकी प्राइवेसी और फ्रीडम का सम्मान भी करें।

अच्छी बोनस मॉम बनने के लिए रखना होगा धैर्य

अच्छी बोनस मॉम बनने के लिए रखना होगा धैर्य

इसके अलावा छोटी-छोटी बातें भी रिश्तों को मजबूत बना सकती हैं। उदाहरण के लिए, उनके लिए कोई प्यारा-सा नोट छोड़ देना, उनके पसंदीदा खेल में हिस्सा लेना या परिवार के साथ कोई मजेदार गतिविधि आयोजित करना उन्हें परिवार का अहम हिस्सा होने का एहसास दिला सकता है।

बोनस मॉम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी ये है कि उसे धैर्य रखना होगा। भरोसा धीरे-धीरे बनता है। रिश्ते को समय दें और जल्दबाजी न करें। हर बच्चे की अपनी गति होती है और उसे उसी गति से आपके करीब आने का अवसर मिलना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप हमेशा अपने वास्तविक स्वरूप में रहें। बनावटीपन के बजाय सच्चा स्नेह और ईमानदारी दिखाएं। बच्चे बहुत आसानी से समझ जाते हैं कि कौन उनके प्रति दिल से जुड़ा हुआ है और कौन केवल दिखावा कर रहा है।

बच्चों की छोटी-बड़ी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करें। उनकी तारीफ करें, उन्हें प्रोत्साहित करें और यह महसूस कराएं कि आप उनकी सफलता पर गर्व करते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और आपके प्रति उनका जुड़ाव भी मजबूत होता है।

कुल मिलाकर बोनस मदर भी इस दुनिया में भगवान की सबसे सुंदर कृति मां का एक नया रूप ही है। भावनाएं वही हैं बस नाम बदला है। यहां खास ये है कि बोनस मदर्स इस दुनिया की उन चंद खुशनसीब लोगों में शुमार हैं जिन्हें किसी बच्चे के जीवन को मां के प्यार से सजाने का मौका मिला है।

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