Neem Water in Tulsi Plant: तुलसी का पौधा अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है। हिंदू घरों में यह आस्था का प्रतीक है। लेकिन कई बार तुलसी बार-बार सूख जाती है। घर में लगे पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं या उसमें कीड़े लग जाते हैं। ऐसे में तुलसी के पौधे को हरा भरा बनाए रखने के लिए बागवानी के एक्सपर्ट अक्सर नीम के पानी का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। अब सवाल यह है कि नीम का पानी तुलसी के लिए फायदेमंद कैसे होता है और इसे किस तरह इस्तेमाल करना चाहिए, आगे जानते हैं।
नीम का पानी तुलसी के लिए कितना अच्छा है, जानें
तुलसी के लिए क्यों खास माना जाता है नीम का पानी
नीम को प्राकृतिक कीटनाशक माना जाता है। नीम की पत्तियों, बीजों और छाल में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कई तरह के कीड़ों और फफूंद को पौधों से दूर रखने में मदद करते हैं। तुलसी के पौधे पर अक्सर छोटे कीड़े, मिलीबग, एफिड्स या फंगल इंफेक्शन का असर देखने को मिलता है। ऐसे में नीम का पानी एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि नीम के पानी में हानिकारक केमिकल नहीं होते, इसलिए घर में लगे तुलसी जैसे धार्मिक और औषधीय पौधों के लिए इसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
पौधे को रखे स्वस्थ
तुलसी में समय-समय पर नीम का पानी डालने से पौधे की पत्तियां अधिक हरी और स्वस्थ रहती है। और जब पौधे पर कीड़ों का हमला कम होता है तो पौधे की ग्रोथ अच्छी होती है। इस वजह से नेचुरल ग्रोथ बूस्टर के तौर पर भी माली नीम के पानी का प्रयोग करते हैं।
हालांकि यहां हम स्पष्ट कर रहे हैं कि यह कोई जादुई खाद नहीं है जो रातोंरात पौधे को बढ़ा दे। इसका मुख्य काम पौधे को रोगों और कीटों से बचाने में मदद करना है जिससे उसकी प्राकृतिक वृद्धि बेहतर हो सके।
तुलसी के लिए कैसे तैयार करें नीम का पानी
नीम का पानी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए 15-20 ताजी नीम की पत्तियां लें और उन्हें एक लीटर पानी में रातभर भिगो दें। अगली सुबह इस पानी को हल्का उबालकर ठंडा कर लें और छान लें।
आप चाहें तो इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर तुलसी की पत्तियों पर छिड़क सकते हैं। इसके अलावा थोड़ी मात्रा में मिट्टी में भी डाल सकते हैं। महीने में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल पर्याप्त माना जाता है।
जरूरत से ज्यादा न डालें
कई लोग सोचते हैं कि जितना ज्यादा नीम का पानी डालेंगे, पौधा उतना ही अच्छा रहेगा। जबकि ऐसा नहीं होता। दरअसल, अगर बहुत अधिक मात्रा में नीम का घोल डाला जाए तो मिट्टी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है। इसलिए हमेशा हल्के घोल का ही उपयोग करें और पौधे की प्रतिक्रिया पर नजर रखें।
तुलसी की अच्छी सेहत के लिए और क्या करें
केवल नीम का पानी डालने से ही तुलसी हमेशा हरी-भरी नहीं रहेगी। इसके लिए सही धूप, संतुलित सिंचाई और समय-समय पर मिट्टी को ढीला करना भी जरूरी है। तुलसी को रोजाना 4 से 6 घंटे धूप मिलनी चाहिए और मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए।
अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए और बीच-बीच में नीम के पानी का उपयोग किया जाए, तो तुलसी का पौधा लंबे समय तक स्वस्थ और हरा-भरा बना रह सकता है।
