Trend of Clay Pots for Water: मई में मौसम ने जम कर कंफ्यूज किया। लोग गर्मी का अनुमान लगाते रहे लेकिन ताप बढ़ने लगाा जून में। 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाते तापमान में राहत पाने के लिए लोग ठंडा खोज रहे हैं। लेकिन इस बार फ्रिज का पानी नहीं बल्कि क्रेज है मटके के पानी का। वही मटका जो कुछ साल पहले आउटडेटेड मानकर किचन से बाहर कर दिया गया था। बढ़ती गर्मी में यही मटका अब नए रंग रूप में रसोई में शान से वापसी कर रहा है।
टोटी वाले मटके हैं बहुत चलन में है
टोटी वाले मटके का चलन
इस बार मिट्टी के मटकों, खासकर टोटी वाले मटकों की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। टोटी वाले मटके आजकल बाजार में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये मटके दिखने में सुंदर होते हैं और इनसे पानी निकालना भी बहुत आसान होता है। सेहत के लिहाज से भी फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर मटके का पानी माना जाता है।
लोगों की इसी पसंद का ध्यान रखते हुए कुम्हार इन दिनों अलग-अलग आकार और डिजाइन में टोटी वाले मटके बना रहे हैं। बाजारों में इनकी खूब बिक्री हो रही है। बढ़ती मांग के चलते इनके दाम भी बढ़ गए है। इसकी एक बड़ी वजह मटके का पानी का स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होना है। प्लास्टिक की बोतलों और फ्रिज के पानी की तुलना में मटके का पानी ज्यादा शुद्ध और प्राकृतिक होता है।
एक मटका विक्रेता शिवानी कुमारी कहती हैं - मटका सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। डॉक्टर भी खुद इसका पानी पीने की सलाह देते हैं। फ्रिज हर कोई नहीं ले पाता है, लेकिन मटका खरीदना हर किसी के बजट में होता है। सबसे ज्यादा मटके के खरीदार स्टूडेंट्स हैं जो नए शहर में आकर कम सेटअप में रहते हैं।
परंपराओं से जोड़ता मटका
विक्रेता कृष्णा कुमार ने कहा - गर्मी के मौसम में लोग अब फिर से पारंपरिक उपायों की ओर लौटते दिख रहे हैं। मिट्टी के घड़े और सुराही जैसे देशी फ्रिज पर्यावरण के अनुकूल हैं और बिजली की खपत भी नहीं करते। यही कारण है कि इनकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। यह गर्मी में सबसे सस्ता, टिकाऊ और सेहतमंद विकल्प है।
मटके पर रिसर्च क्या कहती है
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (एनआईएन) ने भी मिट्टी के बर्तन यानी मटके के इस्तेमाल को सेहत के लिए सबसे सुरक्षित और लाभदायक माना है। रिसर्च के मुताबिक, मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। जब इन छिद्रों से पानी रिसकर बर्तन की बाहरी सतह पर आता है तो यह वाष्पित होने लगता है। इस प्रक्रिया से बर्तन और उसके अंदर का पानी धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है, जो सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है। यह गले के लिए अच्छा होता है और खांसी जैसे लक्षणों में राहत देता है।
मटके का पानी लू से बचाने में भी सहायक होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक खनिज ग्लूकोज स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। यह हमारे शरीर की अम्लीय प्रकृति के साथ मिलकर पीएच संतुलन बनाते हैं, जिससे एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याएं कम होती हैं। साथ ही, यह प्लास्टिक की बोतलों में पाए जाने वाले हानिकारक रसायनों से मुक्त होता है, जिससे हार्मोन संतुलित रहते हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।
इनपुट : IANS
