तमिल शादियों में अचानक संन्यासी बनने क्यों निकल पड़ता है दूल्हा? जानिए 'काशी यात्रा' की अनोखी परंपरा

इस पूरे दृश्य को अगर ध्यान से देखें तो यह उस विचार को सामने रखता है कि जीवन में जिम्मेदारियां स्वीकार करना भी एक तरह का धर्म है।

शादी का मंडप सजा है। रिश्तेदार जमा हैं। दूल्हा शादी के जोड़े में बैठा है। अचानक वह हाथ में छाता और छड़ी उठाता है और मंडप से बाहर निकलने लगता है। पहली नजर में लगता है जैसे दूल्हे का शादी करने का इरादा बदल गया हो। लेकिन तमिल शादियों की एक खास रस्म में यही होता है। इसे काशी यात्रा या काशी यथिरई कहा जाता है।

kashi Yatra

तमिल शादियों की काशी यात्रा परंपरा (AI Image)

यह तमिल शादियों में निभाई जाने वाली एक प्रतीकात्मक रस्म है। दूल्हा कुछ देर के लिए यह दिखाता है कि वह सांसारिक जीवन छोड़कर काशी जा रहा है और संन्यास का रास्ता चुनना चाहता है। तभी दुल्हन के पिता उसे रोकते हैं और वापस आकर गृहस्थ जीवन अपनाने के लिए कहते हैं।

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