हाथ में छोटा सा तार, सामने बड़ा कैमरा: 146 साल पहले कुछ ऐसे ली गई थी भारत की पहली सेल्फी

कैमरा भारी था और फोटो लेना मुश्किल। टाइमर जैसा कुछ नहीं था। फिर भी त्रिपुरा के महाराजा ने अपनी रानी के साथ ऐसी तस्वीर खींची, जो भारतीय इतिहास में सबसे पहली सेल्फी के तौर पर दर्ज हो गई।

आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है। पिछले करीब दो दशक में जब भी फोटो की बात आती है तो सेल्फी शब्द का खूब इस्तेमाल होता है। सेल्फी मतलब कि खुद से खुद की फोटो खींचना। आज सेल्फी लेने के लिए हमें सिर्फ फोन उठाना पड़ता है। कैमरा सामने की तरफ किया। चेहरा स्क्रीन पर देखा और क्लिक। अब करीब 150 साल पीछे चलिए। साल 1880 के आसपास का त्रिपुरा। न कोई स्मार्टफोन था, न फ्रंट कैमरा और न ही सेल्फी स्टिक। कैमरे में सेल्फ टाइमर के बारे में तो सोचा भी नहीं जा सकता था। तब तस्वीर लेना खुद में एक चुनौती भरा काम था।

First Selfie of India

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उसी दौर में त्रिपुरा के महाराजा बीर चंद्र माणिक्य और उनकी पत्नी महारानी खुमान चानू मन्मोहिनी देवी की एक फोटो सामने आई। पहली नजर में यह किसी शाही कपल का सामान्य पोर्ट्रेट लगती है। हालांकि तस्वीर को थोड़ा गौर से देखिए। महाराजा का एक हाथ महारानी के कंधे पर है। दूसरे हाथ में एक छोटा सा तार नजर आता है। यही तार इस पूरा कहानी की सबसे अहम कड़ी है।

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