रसोई में खाना बनाते समय लोग अक्सर इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या पकाना है। लेकिन ये कम ही लोग सोचते हैं कि किस बर्तन में पकाना है। जबकि सही खाने के साथ सही बर्तन में खाना बनाना भी सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। आजकल ज्यादातर घरों में स्टील, आयरन (लोहे) और नॉन-स्टिक बर्तनों (Best Cookware) का इस्तेमाल होता है।
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तीनों की अपनी अलग खूबियां और कुछ खामियां भी हैं। ऐसे में आपको इनके इस्तेमाल का सही तरीका पता हो तो खाना पोषण और स्वाद से भरपूर बनेगा। देखें खाना बनाने के लिए किस बर्तन का इस्तेमाल कब करना बेहतर माना जाता है।
स्टील के बर्तन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं
स्टेनलेस स्टील के बर्तन मजबूत, टिकाऊ और साफ करने में आसान होते हैं। इनमें दाल, सब्जी, चावल या रोजमर्रा का लगभग हर खाना बनाया जा सकता है। अगर अच्छी क्वालिटी वाला स्टील हो, तो यह लंबे समय तक सेफ माना जाता है। ज्यादातर भारतीय रसोई में स्टील के बर्तन सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं।
लोहे के बर्तन से मिल सकता है आयरन
लोहे की कढ़ाई या तवा में खाना बनाने से भोजन में थोड़ी मात्रा में आयरन मिल सकता है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिनमें आयरन की कमी होती है। हालांकि लोहे के बर्तनों को इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, वरना उनमें जंग लग सकती है। बहुत ज्यादा खट्टी चीजें इसमें पकाने से भी बचना चाहिए।
नॉन-स्टिक में कम तेल लगता है
अगर आप कम तेल में खाना बनाना चाहते हैं, तो नॉन-स्टिक बर्तन अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इसमें चीला, डोसा, ऑमलेट या हल्की सब्जियां आसानी से बन जाती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि नॉन-स्टिक बर्तनों पर खरोंच नहीं पड़नी चाहिए। इसमें लकड़ी या सिलिकॉन के स्पैटुला का इस्तेमाल करें। वहीं बहुत तेज आंच पर भी इन्हें गर्म करने से बचें।
कौन-सा बर्तन बेस्ट
रोजमर्रा की दाल, चावल और सब्जियों के लिए स्टील अच्छा विकल्प है। पराठा, रोटी या कुछ सब्जियां लोहे के तवे और कढ़ाई में बनाई जा सकती हैं। वहीं कम तेल वाले नाश्ते या हल्के व्यंजन नॉन-स्टिक में आसानी से तैयार हो जाते हैं। कोई भी बर्तन तभी अच्छा है, जब उसका सही तरीके से इस्तेमाल और मेन्टेन किया जाए। टूटे, जंग लगे या ज्यादा खरोंच वाले बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचें।
