Sawan Geet in Bhojpuri: सावन का महीना अपने साथ हरियाली और उत्साह का एक अलग ही मौसम लेकर आता है। सावन के महीने का जितना बखान किया जाए उतना कम है। इसके उमंग को सही मायनों में शब्दों में पिरोया है हमारे लोकगीतों में। लोकगीतों में भी भोजपुरी के कई ऐसे लोकगीत हैं जिसमें सावन के सारे रंग खुलकर आते हैं। सावन पर भोजपुरी के ये लोकगीत दशकों से गाए गुनगुनाए जा रहे हैं। पूर्वी यूपी और बिहार का सावन भोजपुरी के इन लोकगीतों के बिना अधूरे हैं। सावन की शुरुआत के साथ हम आपके लिए चुनकर लाए हैं भोजपुरी के 5 लोकगीत। यहां देखें सावन के भोजपुरी लोकगीत लिरिक्स हिंदी में:
सावन के गीत भोजपुरी में (Photo: AI Image)
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1. सावन का महीना
सावन का महीना, झुलावे चित चोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
मनवा घबराये मोरा बहे पूरवैया, झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां...
कारी अंधियारी घटा है घनघोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सखियां करे क्या जाने हमको इशारा, मन्द मन्द बहे जल यमुना की धारा...
श्री राधेजी के आगे चले ना कोई जोर, धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,
मेघवा तो गरजे देखो बोले कोयल कारी, पाछवा में पायल बाजे नाचे बृज की नारी...
श्री राधे परती वारो हिमरवाकी और, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सावन का महीना झूलावे चित चोर...
2. आयो सावन को महीना सखी डालो री झूला
आयो सावन को महीना सखी डालो री झूला
सावन की देखो बहार बहार राधा प्यारी-2
बादल भी गरजे बिजली भी चमके,
आती है नन्हीं फुहार, फुहार राधा प्यारी,
सावन की देखो....
बेला चमेली निबोरी भी फूली,
फुले हैं नींबू अनार, अनार राधा प्यारी,
सावन की देखो.....
मोर पपीहा कोयल भी बोले
झींगुर की झीनी पुकार, पुकार राधा प्यारी
सावन की देखो.....
झूला झूले श्याम मन मन में फूले,
3. सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे
सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो पिया हो, कहमाँ से आये बदरिया -२
कहमाँ झड़ी लागे हो धीरे-धीरे -२
सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो धानि हो, पूरब से आईल बदरिया -२
पश्चिम झड़ी लागे हो धीरे-धीरे -२
सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो पिया हो, खोल न बज्र केमरिया -२
चुनर मोरा भींजे हो धीरे-धीरे -२
4. कच्ची नीम की निवौरी सावन जल्दी अइयो रे
कच्ची नीम की निवौरी सावन जल्दी अइयो रे।
बाबा दूर मति ब्यहियो दादी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
बाबुल दूर मति ब्यहियो अम्मा नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
भइया दूर मति ब्यहियो भाभी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
चाचा दूर मति ब्यहियो चाची नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
मामा दूर मति ब्यहियो मामी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
5. हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया
हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
तू तो जात है अकेली, कोई संग न सहेली,
हो छैला (कान्हा) रोक लिहैं तोहरी डगरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
बिजली चम-2 चम-2 चमके, मेघा रिमझिम-2 बरसे,
हो काली नागिन जैसी रात अँधियारी, बदरिया घिर आई ननदी।
बादल गरज रहा घनघोर, घर में सैंया नाहीं मोर,
मैं तो ताकत रहिली पिय की डगरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
कितने आशिक घायल होइहैं, कितने डामल फांसी पइहैं,
कितने पीसत होइहैं जेल में चकरिया, बदरिया घेरे आई ननदी।
हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
सावन के ये लोकगीत आप अपनों के साथ शेयर भी कर सकते हैं। दावा है भोजपुरी के ये लोकगीत आपके किसी भी अपने के सावन की हरियाली को और भी चटक कर सकते हैं।
