योग कोई दर्शन या धर्म नहीं, आंतरिक खुशहाली का विज्ञान है: सद्गुरु

International Yoga Day 2026: योग के असली मकसद पर जोर देते हुए सद्गुरु ने कहा कि जिसे हम योग कहते हैं, वह कोई फिलॉसफी नहीं है, कोई विचारधारा नहीं है, कोई विश्वास प्रणाली नहीं है, या कोई धर्म नहीं है

International Yoga Day: आज दुनिया के कई देशों में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। ईशा फ़ाउंडेशन ने भी इस मौके पर बड़ी संख्या में योग सत्र आयोजित किये। ईशा फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित ऐसे ही एक मुफ्त योग सत्र में वहां के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि, ' बारह साल का समय लगभग एक ‘सौर-चक्र’ के बराबर होता है। इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का हमने एक चक्र पूरा कर लिया है। अब इसे और आगे ले जाने का समय आ गया है, ताकि इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति इस बात से अनजान न रहे कि खुद को बेहतर बनाने के तरीके मौजूद हैं।'

Sadghuru Isha Foundation Yoga day

ईशा फाउंडेशन ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देशभर में 1000 मुफ्त योग सत्र का आयोजन कराया।

योग के असली मकसद पर ज़ोर देते हुए सद्गुरु ने कहा, "जिसे हम योग कहते हैं, वह कोई फिलॉसफी नहीं है, कोई विचारधारा नहीं है, कोई विश्वास प्रणाली नहीं है, या कोई धर्म नहीं है; और निश्चित रूप से, इसका मतलब शरीर को तोडना-मरोड़ना भी नहीं है, जैसा कि बहुत से लोग समझते हैं। ये तो एक रिमाइंडर है। जैसे बाहरी खुशहाली के लिए विज्ञान और तकनीक है, वैसे ही आंतरिक खुशहाली के लिए भी पूरा विज्ञान और तकनीक मौजूद है।"

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