Royal Rasoi: 'जादुई' रकाबी से होकर ही शाहजहां की थाली में पहुंचता था भोजन, बादशाह के लिए बेहद खास थी यह तश्तरी

Royal Rasoi (रॉयल रसोई): आज भी आगरा के किले में शाहजहां की वह रकाबी रखी हुई है। यह वही किला है जहां शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब ने कैद कर रखा था।

Royal Rasoi (रॉयल रसोई): जहांगीर के बेटे शाहजहां ने साल 1628 में मुगल सल्तनत की कमान संभाली थी। लंबे-चौड़े, मजबूत कद-काठी वाला शाहजहां अपने से पहले के मुगल बादशाहों से काफी अलग स्वभाव का था। उसके अलग स्वभाव की झलक उसके रहन-सहन के साथ ही उसके खानपान में भी झलकती थी। शाहजहां के शासन काल में मुगलों की शाही रसोई में जितने प्रयोग हुए उतने शायद कभी नहीं हुए। खाने पीने के बेहद शौकीन शाहजहां के लिए शाही रसोई में एक खास तश्तरी रखी गई थी जिसे रकाबी कहते थे। इस रकाबी से होकर ही भोजन शाहजहां के दस्तरखान तक पहुंचता था। रॉयल रसोई के आज के अंक में हम बात करेंगे उसी रकाबी की।

Royal Rasoi Shahjahan

शाहजहां की शाही रसोई में क्यों रखी गई थी वह जादुई तश्तरी (AI Image)

शाहजहां की 'जादुई' रकाबी

ताजमहल बनवाने वाला शाहजहां मुगल दरबार की साजिशों और सत्ता संघर्षों से भली-भांति परिचित था। इसलिए उसने अपनी सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए, जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। शाहजहां ने अपने लिए शाही रसोई में एक ऐसे शख्स की नियुक्ति करवाई थी जो उसे परोसे जाने वाले को पहले खुद चखता था। ऐसा इसलिए किया गया था कि अगर किसी षडयंत्र के तहत बादशाह के खाने में किसी ने जहर मिला दिया हो तो उसका पता चल सके।

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