टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर निकलना क्यों है मुश्किल? थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्टजर ने बताए 5 आसान रास्ते

थेरेपिस्ट के अनुसार, टॉक्सिक रिश्तों में अक्सर ट्रॉमा बॉन्डिंग और इंटरमिटेंट रीइन्फोर्समेंट काम करता है। इसका मतलब है कि पार्टनर लगातार बुरा व्यवहार नहीं करता; बीच-बीच में वह बहुत ज्यादा प्यार और परवाह भी दिखाता है।

किसी भी रिश्ते की शुरुआत प्यार और भरोसे के साथ होती है, लेकिन कई बार वही रिश्ता मानसिक तनाव और घुटन की वजह बन जाता है। इसे ही हम टॉक्सिक रिलेशनशिप कहते हैं। हैरानी की बात यह है कि रिश्ता दर्दनाक होने के बावजूद लोग इससे आसानी से बाहर नहीं निकल पाते। प्रसिद्ध थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्टजर बताते हैं कि किसी जहरीले रिश्ते को छोड़ना इतना कठिन क्यों होता है और इससे बाहर निकलने के सही तरीके क्या हैं।

Toxic relationships

टॉक्सिक रिलेशनशिप्स से कैसे बाहर आएं (Photo: iStock)

टॉक्सिक रिलेशनशिप छोड़ना कठिन क्यों है?

थेरेपिस्ट के अनुसार, टॉक्सिक रिश्तों में अक्सर ट्रॉमा बॉन्डिंग और इंटरमिटेंट रीइन्फोर्समेंट काम करता है। इसका मतलब है कि पार्टनर लगातार बुरा व्यवहार नहीं करता; बीच-बीच में वह बहुत ज्यादा प्यार और परवाह भी दिखाता है। प्यार और दर्द का यह उतार-चढ़ाव इंसान के दिमाग को एक चक्र में फंसा देता है। व्यक्ति को लगता है कि शायद सब कुछ पहले जैसा ठीक हो जाएगा और इसी उम्मीद में वह दर्द सहता रहता है।

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