प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसी विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो वहां के नेताओं के लिए हमेशा ही भारत से विशेष तोहफे लेकर जाते हैं। उनके दिए गए उपहार सिर्फ औपचारिकता नहीं होते, बल्कि उनमें भारत की संस्कृति, कला और परंपरा की झलक दिखाई देती है। हाल ही में इटली दौरे पर मोदी जी ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की और उन्हें भारत में बुनी खास स्टोल गिफ्ट की है। मोदी जी ने PM मेलोनी को असम का प्रसिद्ध मूंगा सिल्क स्टोल भेंट किया है। इस खास रेशम को भारत की सबसे अनमोल पारंपरिक बुनाइयों में गिना जाता है। इसकी पहचान इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग, महीनों की मेहनत और बेहद दुर्लभ उत्पादन है।
मूंगा सिल्क को केवल एक रेशम का कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी विरासत माना जाता है। यही वजह है कि इसे शाही सुनहरा रेशम भी कहा जाता है। असम के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को संभाले हुए हैं। आइए जानते हैं आखिर क्यों मूंगा सिल्क इतना खास माना जाता है और इसकी कीमत लाखों तक क्यों पहुंच जाती है।
क्या होता है मूंगा सिल्क?
मूंगा सिल्क असम में बनने वाला बेहद दुर्लभ और पारंपरिक रेशम है। यह खास तरह के रेशम के कीड़ों से तैयार किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग होता है, जो इसे बाकी सिल्क से अलग पहचान देता है। कहा जाता है कि समय के साथ इसकी चमक और ज्यादा निखरती जाती है। यही वजह है कि इसे “गोल्डन सिल्क” यानी सुनहरा रेशम कहा जाता है। दुनिया में यह रेशम बहुत सीमित मात्रा में बनता है, इसलिए इसे दुर्लभ और लग्जरी कपड़ों की श्रेणी में रखा जाता है।
हजारों साल पुरानी है इतिहास
मूंगा सिल्क सिर्फ एक कपड़ा नहीं बल्कि भारत की पुरानी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक असम में इसकी बुनाई की परंपरा करीब 2300 साल पुरानी है। पुराने समय में राजघराने और अमीर परिवार खास मौकों पर मूंगा सिल्क पहनते थे। इसे शाही कपड़ों में गिना जाता था। आज भी असम के कई गांवों में लोग पारंपरिक तरीके से इसकी बुनाई करते हैं।
मोदी जी ने ये स्टोल गिफ्ट किया
मोदी जी ने प्रधानमंत्री मेलोनी को असम में बुना हुआ खास मूंगा सिल्क का स्टोल गिफ्ट किया है। उन्होने जो स्टोल भेंट में दिया है, उसका रंग काला या गहरा नीला, सफेद और बेज के खूबसूरत कॉम्बिनेशन के साथ तैयार किया गया है। खूबसूरत बूटी डिजाइन और टैसल वाला ये स्टोल बहुत ही सिंपल और सुंदर नजर आ रहा है।
पारंपरिक ज्यामितीय और फूलों वाले पैटर्न इसकी हैंडलूम कला को उभारते हैं। नीचे बने टैसल्स इसे क्लासिक लुक देते हैं, जबकि कपड़े की हल्की सुनहरी चमक इसकी प्रीमियम और शाही पहचान दिखाती है।
कितने दिन में तैयार होता है मूंगा सिल्क ?
मूंगा सिल्क तैयार करने में काफी समय और मेहनत लगती है। सबसे पहले खास किस्म के रेशम के कीड़ों को पेड़ों की पत्तियां खिलाई जाती हैं। फिर उनके बनाए कोकून से बहुत महीन धागा निकाला जाता है। इसके बाद धागों को साफ कर हाथों से बुनाई की जाती है। एक स्टोल या साड़ी तैयार करने में कई दिनऔर कई बार महीनों तक का समय लग जाता है। यही कारण है कि यह रेशम इतना महंगा होता है। एक प्योर मूंगा सिल्क स्टोल को करघे पर तैयार करने में सिर्फ बुनाई के लिए करीब 3 से 7 दिन लग सकते हैं। वहीं अगर डिजाइन ज्यादा बारीक और जटिल हो, तो इसे बनाने में 1 से 2 सप्ताह तक का समय भी लग जाता है।
कितनी होती है कीमत?
असली मूंगा सिल्क की कीमत उसकी डिजाइन और बुनाई पर निर्भर करती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मूंगा सिल्क शॉल की कीमत करीब 3,500 रुपये से लेकर 38,000 रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है। इसकी कीमत मुख्य रूप से सिल्क की शुद्धता पर निर्भर करती है। ब्लेंडेड मूंगा शॉल आमतौर पर सस्ते होते हैं। जबकि शुद्ध हैंडलूम मूंगा सिल्क शॉल काफी महंगे माने जाते हैं। एक हाथ से बना मूंगा सिल्क स्टोल हजारों रुपये में मिलता है, जबकि खास डिजाइन वाली साड़ियां लाखों रुपये तक पहुंच सकती हैं। कुछ प्रीमियम मूंगा सिल्क साड़ियों की कीमत 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी बताई जाती है।
मूंगा सिल्क से क्या बनता है
मूंगा सिल्क से साड़ी, स्टोल, दुपट्टा, शॉल, कुर्ता और पारंपरिक कपड़े बनाए जाते हैं। इसकी सुनहरी चमक और मजबूत कपड़े की वजह से इसे शाही रेशम माना जाता है। असम में खास अवसरों और शादी-ब्याह में मूंगा सिल्क पहनना सम्मान और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
मणिपुर का सिल्क स्टोल भी किया गिफ्ट
मोदी जी प्रधानमंत्री मेलोनी को मूंगा सिल्क स्टोल के साथ साथ खास मणिपुर में बुना हुआ शिरुई लिली सिल्क स्टोल भी गिफ्ट किया है। शिरुई लिली मणिपुर का दुर्लभ और बेहद खूबसूरत फूल माना जाता है। इस स्टोल में पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक बुनाई, सांस्कृतिक कला और प्रकृति की सुंदरता की झलक देखने को मिलती है।
