पारसी फूड की जान है 'खट्टू, मीठू, तीखू', 1000 साल पुराना है इस स्वाद का इतिहास

पारसी समुदाय की जड़ें प्राचीन फारस, यानी आज के ईरान से जुड़ी हैं। करीब एक हजार साल पहले यह समुदाय भारत आया और गुजरात के तटीय इलाकों में बस गया।

भारत के खाने की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां हर समुदाय की अपनी अलग रसोई है। इन्हीं में एक है पारसी खाना, जिसकी पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, उसके इतिहास से भी है। अगर आपने कभी धनसाक, पत्रा नी मच्छी या साली बोटी खाई है, तो आपने महसूस किया होगा कि इनमें खट्टा, मीठा और तीखा तीनों स्वाद साथ चलते हैं। पारसी लोग इसे प्यार से 'खट्टू, मीठू, तीखू' कहते हैं। यही बैलेंस उनकी रसोई को सबसे अलग बनाता है।

Parsi Food

पारसी फूड की जान है 'खट्टू, मीठू, तीखू', 1000 साल पुराना है इस स्वाद का इतिहास (AI Generated Image)

फारस से भारत तक पहुंचा यह स्वाद

पारसी समुदाय की जड़ें प्राचीन फारस, यानी आज के ईरान से जुड़ी हैं। करीब एक हजार साल पहले यह समुदाय भारत आया और गुजरात के तटीय इलाकों में बस गया। यहां की मिट्टी, मौसम और मसालों ने उनकी रसोई को नया रूप दिया। उन्होंने अपनी पुरानी रेसिपी को भारतीय स्वाद के साथ मिलाया। इसी मेल से एक ऐसी पाक परंपरा बनी, जो आज भी अपनी अलग पहचान रखती है।

End of Feed