Parenting Tips in Hindi: बहुत से बच्चों में ये देखने को मिलता है कि वह अपने उम्र के बच्चों के बीच भी उस तरह से नहीं घुल-मिल पाता जितना दूसरे बच्चे करते हैं। ऐसे बच्चों में कॉन्फिडेंस की कमी हो सकती है। इस कारण से उसका व्यवहार दब्बू सा बन जाता है। हालांकि क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे ऐसे क्यों हो जाते हैं। क्या ऐसे व्यवहार में बच्चों का दोष होता है या फिर पेरेंट्स की गलती। इंटरनेट पर उपलब्ध जमाम रिसर्च रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की मानें तो पेरेंट्स अगर अपनी 4 आदतें सुधार लें तो बच्चा कभी भी दब्बी नहीं बनेगा। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो चार बातें:
बच्चों को दब्बू बनाती हैं पेरेंट्स की ये चार आदतें, बच्चे का भला चाहते हैं तो आज ही कर लें सुधार (Photo: iStock)
दूसरों से तुलना
कभी भी बच्चों की तुलना किसी दूसरे बच्चों से ना करें। बच्चों को बार-बार ये कहना कि फलाना तो इतना बढ़िया है और तुम अपने आप को देखो या तुमसे तो लाख गुना अच्छा वो है..ऐसी बातें बच्चों के कॉन्फिडेंस को बुरी तरह से आघात पहुंचाती हैं। वह हमेशा सोचता है कि शायद मुझमें बहुत सी कमियां हैं। यह सोच उसे हमेशा दब्बू बनाए रखती है।
बात-बात पर डांटना
बच्चों के सख्त रहने में कोई बुराई नहीं है लेकिन उन्हें हर बात पर डांटने या सजा देने को एक्सपर्ट्स सही नहीं मानते। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों को हर बात पर डांटने से वह सच बोलने से या फिर अपनी भावनाएं जाहिर करने से डरने लगता है। यह डर धीरे-धीरे उसके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है।
प्रोत्साहित ना करना
बहुत से पेरेंट्स ऐसे होते हैं तो बच्चों की गलती पर तो उन्हें डांटते हैं लेकिन जब वह कुछ अच्छा करते हैं तो उनकी तारीफ नहीं करते। बच्चों के लिए प्रोत्साहन संजीवनी का काम करता है। बच्चे को जब माता-पिता की तारीफ मिलती है तो वह हर बार कुछ अच्छा करने की कोशिश करता है। यह आदत उसके कॉन्फिडेंस को सातवें आसमान तक ले जाती है।
बच्चों के सामने लड़ना
बहुत से पेरेंट्स बच्चों के सामने ही लड़ने लगते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा तो छोटा है उसे क्या समझ आएगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पेरेंट्स को लड़ता देख बच्चा असुरक्षित महसूस करने लगता है। असुरक्षा की ये भावना उसे बाहर भी परेशान करती है और वह दूसरों बीच घुलने मिलने से कतराने लगता है।
