Love vs Attachment: जिसे हम प्यार समझ रहे, वो खोने का डर तो नहीं? ओशो बता गए हैं लव और अटैचमेंट का फर्क

किसी से प्यार करना और उसे अपना बना लेना दो अलग बातें हैं। रिश्ते में साथ, दोस्ती और अपनापन हो सकता है, लेकिन उसके लिए सामने वाले की आजादी खत्म करना जरूरी नहीं।

किसी को खोने का डर कई बार हमें उसके और करीब जाने के लिए मजबूर करता है। बार-बार फोन करना, हर बात का जवाब जानना, सामने वाला कहां है यह पूछते रहना या उसकी जिंदगी में अपनी जगह को लेकर लगातार आश्वासन मांगना। हमें लगता है कि यह सब प्यार है। हालांकि ओशो सालों पहले ये कह गए हैं कि ऐसी बातों के पीछे कई बार प्यार से ज्यादा लगाव और खोने का डर हो सकता है।

Love or Affection

ओशो की इन बातों से समझें प्यार और लगाव में सही फर्क (Photo: iStock)

प्यार में पकड़ नहीं, आजादी होती है

ओशो प्यार और लगाव के बीच एक बुनियादी फर्क बता गए हैं। उनके मुताबिक लगाव में व्यक्ति दूसरे को अपने पास बनाए रखना चाहता है। उसे खोने का डर होता है। इसी डर से अधिकार की भावना पैदा होती है। फिर रिश्ते में ईर्ष्या, शक और नियंत्रण आने लगता है। इसके उलट प्यार में सामने वाले को अपनी जिंदगी जीने की आजादी देने की जगह होती है।

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