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National Workaholics Day 2026: क्या होता है वर्कोहॉलिक होना, आखिर क्यों मनाया जाता है नेशनल वर्कहॉलिक्स डे

National Workaholics Day 2026: नेशनल वर्कहॉलिक्स डे हमें खुद से कुछ जरूरी सवाल पूछने का मौका देता है- क्या हम काम कर रहे हैं या काम हमें चला रहा है? क्या हमारा काम हमारी सेहत पर भारी पड़ रहा है।

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National Workaholics Day हर साल 5 जुलाई को सेलिब्रेट किया जाता है (Photo: iStock)

National Workaholics Day 2026: सुबह उठते ही सबसे पहले ऑफिस के मैसेज चेक करना, छुट्टियों में भी लैपटॉप साथ रखना, डिनर के बीच में ऑफिस कॉल उठाना और 'बस यह एक काम और' कहते-कहते आधी रात कर देना। अगर ये सब आप भी करते हैं तो शायद आप भी उस दुनिया का हिस्सा हैं जिसे आजकल 'वर्कहॉलिक कल्चर' कहा जाता है। इसी वर्कहॉलिक कल्चर का हिस्सा बन चुके लोगों को काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन की अहमियत याद दिलाने के लिए हर साल 5 जुलाई को नेशनल वर्कहॉलिक्स डे मनाया जाता है।

क्या होता है वर्कहॉलिक होना?

'वर्कहॉलिक' ऐसे इंसान को कहते हैं जो जरूरत से ज्यादा काम करता है और धीरे-धीरे काम उसके जीवन का केंद्र बन जाता है। वर्कहॉलिक लोग अकसर यह मानने लगते हैं कि ज्यादा काम करना ही सफलता का एकमात्र रास्ता है। वे छुट्टियों में भी काम करते हैं, परिवार और दोस्तों के साथ बिताए जाने वाले समय को टालते रहते हैं और कई बार आराम करने पर अपराधबोध तक महसूस करते हैं।

क्यों मनाया जाता है नेशनल वर्कहॉलिक्स डे?

पहली नजर में यह दिन काम के प्रति समर्पण का जश्न मनाने जैसा लग सकता है, लेकिन इसका मकसद कुछ और है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि मेहनत और कामयाबी जरूरी हैं, लेकिन लगातार काम करते रहना हमेशा अच्छी बात नहीं होती।

यह खास दिन इसलिए सेलिब्रेट किया जाता है कि हमे पता चले कि काम और निजी जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा काम करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। तनाव, नींद की कमी, चिंता, रिश्तों में दूरियां और 'बर्नआउट' जैसी समस्याएं कई बार इसी असंतुलन का नतीजा होती हैं।

National Workaholics Day से हम क्या सीख सकते हैं?

नेशनल वर्कहॉलिक्स डे हमें खुद से कुछ जरूरी सवाल पूछने का मौका देता है। क्या हम काम कर रहे हैं या काम हमें चला रहा है? क्या हमारी उपलब्धियां हमारे रिश्तों और स्वास्थ्य की कीमत पर हासिल हो रही हैं?

इस दिन ऑफिस समय के बाद खुद को डिस्कनेक्ट करना, छुट्टियों को सचमुच छुट्टी की तरह लेना, परिवार और दोस्तों के लिए समय निकालना और अपने शौक को भी जिंदगी का हिस्सा बनाना जैसे संकल्प ले सकते हैं।

नेशनल वर्कहॉलिक्स डे सिखाता है कि करियर महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य, रिश्ते और मानसिक शांति भी उतनी ही कीमती हैं। आखिर जिंदगी सिर्फ काम करने के लिए नहीं, जीने के लिए भी है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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