Monsoon Gardening Tips: बरसात का मौसम गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए उमंग लेकर आता है। दरअशल मानसून की दस्तक साथ ही उने गार्डन में लगे पौधों में नई जान आ जाती है। पौधों की ग्रोथ तेज हो जाती है। हालांकि ऐसा हर पौधे के साथ नहीं होता। कुछ पौधे मानसून में बिल्कुल भी नहीं चल पाते। तो अगर आप भी गार्डनिंग का शौक रखते हैं और बरसात की आमद के साथ अपने गार्डन में नए पौधे लगाने की सोच रहे हैं तो इन 7 पौधों को ना ही लगाएं तो बेहतर रहेगा:
मानसून में मर जाते हैं पौधे, ना लगाएं तो ही बेहतर
सूरजमुखी
सूरजमुखी को भरपूर धूप और हल्की सूखी मिट्टी पसंद होती है। लगातार बारिश और पानी जमा होने से इसकी जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि इसे मानसून के बजाय गर्म और धूप वाले मौसम में लगाना बेहतर माना जाता है।
कैक्टस
कैक्टस कम पानी में आसानी से बढ़ने वाला पौधा है। बारिश के मौसम में मिट्टी में ज्यादा नमी होने से इसकी जड़ें सड़ने लगती हैं। इसलिए मानसून में इसे लगाने से बचना चाहिए।
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चमेली
चमेली की खुशबू भले ही मन मोह ले, लेकिन ज्यादा बारिश इस पौधे के लिए परेशानी बन सकती है। लगातार सीलन और नमी के कारण इसमें फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
गुड़हल
गुड़हल का पौधा बहुत ज्यादा पानी सहन नहीं कर पाता। बरसात के मौसम में इसकी जड़ें कमजोर पड़ सकती हैं और फूलों की संख्या भी कम हो सकती है। इसलिए इसे अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में ही लगाना चाहिए।
लैवेंडर
लैवेंडर सूखे और गर्म वातावरण में अच्छी तरह पनपता है। लगातार बारिश इसकी बढ़त को प्रभावित कर सकती है और पौधा जल्दी खराब हो सकता है।
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रोजमेरी
रोजमेरी ऐसा पौधा है जिसे कम पानी की जरूरत होती है। मानसून में जलभराव होने पर इसकी जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा मुरझा सकता है।
सक्यूलेंट पौधे
एलोवेरा, जेड प्लांट और अन्य सक्यूलेंट पौधे अपनी पत्तियों में पानी जमा करके रखते हैं। ऐसे में बरसात की अतिरिक्त नमी इनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
अगर आप इन पौधों को लगाना चाहते हैं, तो ऐसे गमले चुनें जिनमें पानी आसानी से निकल सके। साथ ही जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से बचें। थोड़ी सावधानी बरतकर आप अपने पौधों को मानसून की मार से बचा सकते हैं।
