बारिश का मौसम हो या गर्म-गर्म दोपहर का खाना, कढ़ी का नाम सुनते ही मन में घर की रसोई की खुशबू तैरने लगती है। दही और बेसन से बनने वाली यह देसी डिश सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और अपनापन भी अपने साथ लेकर आती है। हर राज्य में कढ़ी बनाने का तरीका अलग हो सकता है। कहीं कढ़ी में कुरकुरे पकौड़े डाले जाते हैं तो कहीं इसे हल्के और सिंपल अंदाज़ में बनाया जाता है।
घी में जब राई, जीरा, करी पत्ता और लाल मिर्च चटकते हैं, तभी कढ़ी का स्वाद पूरी तरह खिलकर सामने आता है। कई बार लोग छोटी-छोटी गलतियों की वजह से कढ़ी का स्वाद बिगाड़ देते हैं, जैसे तड़का सही समय पर न लगाना या नमक का संतुलन बिगड़ जाना। अगर सही तरीके और मसालों का ध्यान रखा जाए, तो साधारण कढ़ी भी होटल जैसी स्वादिष्ट बन सकती है।
कढ़ी में कौन सा तड़का लगता है?
कढ़ी में ज्यादातर राई यानी सरसों के दाने का तड़का लगाया जाता है। इससे कढ़ी में हल्की तीखी खुशबू और देसी स्वाद आता है। कई लोग इसमें जीरा भी डालते हैं, खासकर राजस्थान और उत्तर भारत की कुछ रेसिपीज में। अगर आप ज्यादा खुशबूदार स्वाद चाहते हैं, तो राई और जीरा दोनों का इस्तेमाल एक साथ भी कर सकते हैं।
कढ़ी में तड़का लगाने का सही तरीका
सबसे पहले एक छोटे पैन में घी या तेल गर्म करें। फिर उसमें राई डालें। जब राई चटकने लगे, तब जीरा, सूखी लाल मिर्च, करी पत्ता और चुटकीभर हींग डालें। यह तड़का तैयार कढ़ी के ऊपर डालते ही उसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है।
कढ़ी में नमक कब डालें?
कई लोग शुरुआत में ही ज्यादा नमक डाल देते हैं, लेकिन यह सही तरीका नहीं माना जाता। कढ़ी को पहले अच्छे से पकने दें, क्योंकि दही और बेसन पकने के बाद स्वाद बदलता है। जब कढ़ी आधी पक जाए, तब नमक डालना बेहतर माना जाता है। इससे स्वाद बहुत ही बैलेंस हो जाता है।
घी से बढ़ता है स्वाद
अगर तड़का घी में लगाया जाए, तो कढ़ी का स्वाद और भी शानदार हो जाता है। देसी घी की खुशबू कढ़ी को रेस्टोरेंट जैसा टेस्ट देती है। कढ़ी को हमेशा धीमी आंच पर पकाना चाहिए। इससे बेसन अच्छी तरह पकता है और स्वाद ज्यादा क्रीमी बनता है। सही और संतुलित मसालों वाला तड़का, आपकी साधारण कढ़ी को बेहद स्वादिष्ट बना देगा।
