Intezar Shayari (इंतजार शायरी 2 लाइन): इंतज़ार एक ऐसा एहसास है, जो न बोलता है, न चुप रहता है। यह उस शाम की तरह होती है जो सूरज को जाते हुए देखती है, लेकिन रात के आने से पहले एक दीर्घ मौन ओढ़ लेती है। कभी किसी के लौट आने की उम्मीद, कभी किसी ख्वाब के सच होने की चाह और कभी बस यूं ही बीते लम्हों की दस्तक..हर इंतज़ार में एक अधूरी कविता छिपी होती है। इसी इंतजार को कई शायरों ने अपने शब्दों से जुबां दी है। इन शायरों ने इंतजार पर ऐसे-ऐसे खूबसूरत शेर लिखे हैं कि पढ़ने-सुनने वाले उसी में डूब कर रह जाते हैं। यहां हम आपके लिए इंतजार पर शायरी की दुनिया के बेहद मुकम्मल नामों के कुछ चुनिंदा शेर लेकर आए हैं। इन शायरों की नजर में इंतज़ार में धैर्य है तो बेचैनी भी। आप भी ये शेर पढ़ें और इंतजार के मजे लें:
Intezar Shayari in Hindi (इंतजार शायरी दो लाइन)
Intezar Shayari in Hindi
1. तेरे आने की क्या उमीद मगर
कैसे कह दूं कि इंतिज़ार नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
2. माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
- अल्लामा इक़बाल
3. न कोई वादा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था
- फ़िराक़ गोरखपुरी
4. ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
- मिर्ज़ा ग़ालिब
2 line Intezar Shayari
5. कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएंगे सुनते थे सहर होगी
- फैज़ अहमद फ़ैज़
6. ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूं
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूं
- मुनीर नियाज़ी
7. ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर
वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं
- फैज़ अहमद फ़ैज़
8. वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
- परवीन शाकिर
9. जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
- जौन एलिया
10. बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूं
कार-ए-जहा दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर
- अल्लामा इक़बाल
11. मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा
- साक़ी फ़ारुक़ी
12. मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना
- साहिल सहरी नैनीताली
13. ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
- दाग़ देहलवी
14. जानता है कि वो न आएंगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
15. वो चांद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूं शाम से मैं
- फ़रहत एहसास
16.सौ चांद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी
- जां निसार अख़्तर
17. जिस की आंखों में कटी थीं सदियां
उस ने सदियों की जुदाई दी है
- गुलज़ार
इंतजार पर लिखे इन शेरों से आपको यह तो समझ आ गया होगा कि इंतजार वह पुल है जो अतीत और भविष्य के बीच लटकता है। न पूरी तरह टूटा, न पूरी तरह जुड़ा। कोई इसे प्रेम मानता है, कोई सजा तो कोई आशा। लेकिन सच यही है कि इंतजार वो इम्तिहान है जिसमें वक्त सवाल नहीं करता, बस जवाब देखता है – हम टिके रहे या थक कर लौट गए।
