History and Benefits of Kesar In Hindi: फिल्म 'ओम शांति ओम' में दीपिका पादुकोण का हिट डायलॉग था- एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू। आपको बता दें कि देर सबेर रमेश बाबू को एक चुटकी सिंदूर की कीमत भले पता चल जाए लेकिन वो शायद ही अंदाजा लगा पाएं कि एक चुटकी केसर की कीमत कितनी होती है। जी हां, वही केसर जो धरती पर मौजूद सबसे महंगा मसाला है। यह सिर्फ केसर ही है जिसकी कीमत हजारों साल बीतने के बावजूद भी कभी कम नहीं हुई। इसके लिए युद्ध हुए, लड़ाई के मैदान में इससे घाव भरे गए। दुनिया को महकाया, केसर ने खाने का स्वाद बढ़ाया। दवाइयों के जरिए बीमारों को बचाया और कपड़े रंगने में भी इस्तेमाल हुई। केसर जितना लाभकारी और महकदार है, इसका इतिहास भी उतना ही ज्यादा रोचक है।
Explained History Of Saffron
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3000 साल से भी पहले से उग रहा केसर
सबसे पहले केसर की खेती कब और किसने की इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी तो नहीं है लेकिन प्राचीन ग्रीस में एक आर्कियोलॉजिकल साइट पर करीब 3 हजार साल पुराने चित्र मिले थे, जिनमें कुछ लड़कियों और बंदरों को केसर के फूल तोड़ते दिखाया गया है। इससे माना जा सकता है कि केसर 3 हजार साल से भी ज्यादा समय से उगाया जा रहा है। रोम के रईस अपने राजा नीरो के स्वागत में सड़कों पर केसर बिछा देते। वहां की औरतें केसर से बना इत्र इस्तेमाल करती थीं। देवताओं को चढ़ाने के साथ ही शराब से लेकर भोजन तक में केसर डाली जाती। बादशाह अकबर भी केसर की खुशबू के मुरीद थे। उनके महल की खिड़कियों के बाहर केसर के खेत थे, ताकि महल केसर की खुशबू से महकता रहे।
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बात इसके नामकरण की करें तो केसर को ग्रीस के इलाकों में कुंकुम भी कहा जाता है। अरबी और उर्दू में केसर जाफरान कहलाया। जाफरान से ही फ्रेंच भाषा में safran बना, जो अंग्रेजी में saffron हो गया। हिंदुस्तान में केसर से ही केसरी रंग बना है।
यौन क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता था केसर
सदियों से केसर को अलग-अलग मकसद से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसका इस्तेमाल शारीरिक संबंध बनाते समय यौन क्षमता बढ़ाने के लिए भी होता था। इजिप्ट की मशहूर महारानी क्लियोपेट्रा भी केसर इसी मकसद से इस्तेमाल करती थी। वह अपने हरम में पुरुषों को रखती थी और उनसे मिलने से पहले गर्म पानी में एक चौथाई प्याला केसर डालकर उससे नहाती थी, ताकि प्यार भरे पल और आनंददायक बन सकें। क्लियोपेट्रा के अलावा सिकंदर भी केसर खूब पसंद करता था। वह केसर डालकर अपनी चाय और खाना बनवाता था। वह भी केसर से नहाता था। सिकंदर के सैनिक केसर से अपने घाव भरा करते थे। मुगल अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए खास तरह का पलंग तोड़ पान खाया करते थे। इस पान बिना केसर के नहीं बनता था।
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सबसे ज्यादा कहां पैदा होती है केसर
केसर दुनिया में सबसे ज्यादा ईरान में पैदा होती है। दुनिया के 90 फीसदी केसर की पैदावार ईरान में होती है। ईरान दुनिया भर में पैदा होने वाले लगभग 500 टन केसर में से 450 टन की सप्लाई करता है। 25 टन केसर का उत्पादन कर भारत दूसरे पायदान पर है। भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड उगाया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भले सबसे ज्यादा केसर ईरान पैदा करता हो लेकिन सबसे अच्छी क्वालिटी का केसर कश्मीर का माना जाता है।
भारत में केसर का इतिहास
कुछ इतिहासकार बताते हैं कि करीब ढाई हजार साल पहले पारसी कारोबारी ईरान से केसर लेकर कश्मीर पहुंचे थे। चीनी इतिहास के मशहूर मेडिकल एक्सपर्ट लिख कर गए हैं कि कश्मीर में लोग भगवान बुद्ध को केसर के फूल चढ़ाते थे। 1700 साल पहले लिखी इस किताब में जिक्र है कि जब एक खास तरह के फूल सूख जाते हैं, तो उससे केसर निकाला जाता है। बौद्ध भिक्षु इसी केसर के रंग से कपड़ों को केसरिया रंगकर पहनते हैं।
कश्मीर में केसर की खेती की शुरुआत को लेकर एक लोक कथा और है। लोग बताते हैं कि आज से लगभग 800 साल पहले एक सूफी संत कश्मीर पहुंचे थे। वहां पर वह बीमार पड़ गए। कश्मीर के स्थानीय लोगों ने सूफी संत का इलाज किया। कश्मीरियों की तामीरदारी से वह संत इतने खुश हुए कि उन्होंने लोगों को केसर की एक गांठ उपहार के तौर पर भेंट की। इसी के बाद से वहां केसर की खेती शुरू हो गई।
कितने रुपये किलो बिकता है केसर
केसर दुनिया का सबसे महंगा मसाला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में केसर की कीमत 3.5 लाख से 10 लाख रुपये प्रति किलो तक है। कश्मीरी केसर 5 से 6 लाख रुपए किलो तक बिकती है वहीं ईरानी केसर की कीमत इससे आधी है। सबसे अच्छी किस्म के केसर का दाम 10 लाख रुपए किलो तक भी होता है। अपनी कीमत के कारण ही केसर को धरती का सोना या लाल सोना कहा जाता है।
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इतना महंगा क्यों है केसर
केसर इतना महंगा क्यों बिकता है। इसका जवाब हर कोई जानना चाहता होगा। हजारों साल से इतना केसर की कीमत इतना ज्यादा होने के पीछे कोई लिखित कारण तो नहीं है लेकिन माना जाता है कि इसकी कम पैदावार और अधिक मेहनत वाली कटाई प्रक्रिया के चलते इसके दाम आसमान छूते हैं। दरअसल केसर क्रोकस सेटिवस नाम के फूल के लाल स्टिग्मा से प्राप्त होता है। केसर को निकालने के लिए पहले फूलों को चुनकर किसी छायादार स्थान में बिछा देते हैं। सूख जाने पर फूलों से केसर को अलग कर लेते हैं। रंग एवं आकार के अनुसार इन्हें - मागरा, लच्छी, गुच्छी आदि श्रेणियों में बांटते हैं। एक किलो केसर प्राप्त करने के लिए 150,000 से 200,000 फूलों को इकट्ठा करना होता है, और यह सब हाथ से किया जाता है। केसर इतना हल्का होता है कि एक ग्राम में करीब 463 धागे होते हैं।
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केसर के फायदे
केसर कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयों में इस्तेमाल होती है। कई तरह के व्यंजन खास तौर पर केसर डालकर ही स्वादिष्ट बनते हैं। इंटरनेट पर मौजूद जानकारियों के मुताबिक खाने में मौजूद केसर की सुगंध और रंग बढ़ा देती है।सका इस्तेमाल पाचन शक्ति बढ़ाता है। इतना ही नहीं केसर का सेवन दिल, दिमाग, लिवर, आंखों और मसूड़ों को हेल्दी रखता है। जैसा कि मुगल काल से होता आ रहा है, केसर पुरुषों की यौन शक्ति को भी बढ़ाता है। अपने तमाम गुणों के कारण अब तो केसर पान मसाला में भी आने लगा है। अजय देवगन और अक्षय कुमार जैसे कई बड़े सितारे पान मसाला के ऐड में जुबां केसरी की तरफदारी करते दिख जाते हैं।
..और अंत में जब सोना-चांदी छोड़ केसर लूट ले गए लुटेरे
12वीं सदी से पहले यूरोप मुस्लिम देशों से केसर मंगाता था। लेकिन धर्मयुद्ध (क्रूसेड) के दौरान यूरोप ने इस्लामिक राष्ट्रों से केसर का आयात बंद कर अपने यहां केसर उगाना शुरू कर दिया। 14वीं सदी के मध्य में यूरोप में कुख्यात प्लेग फैला। प्लेग के दौरान केसर के दाम भी बढ़े। दरअसल केसर उन दिनों प्लेग के इलाज में काफी काम आता था। हालात ऐसे बने कि समुद्री लुटेरे सोने-चांदी से लदे जहाज छोड़ केसर लूटने लगे। स्विट्जरलैंड के बेसल जा रही 363 किलो केसर रास्ते में ही लूट ली गई। इसका अंजाम ये हुआ कि बेसल और लुटेरों के बीच करीब 4 महीने तक युद्ध चला। इसके बाद से बेसल के लोग केसर की खेती को सुरक्षित रखने के लिए खेतों में हथियारबंद गार्ड्स तैनात करने लगे।
