Hanuman Ansh Actor Shobhinaw Satya: हनुमान अंश फिल्म में नीम करोली बाबा की भूमिका निभाकर चर्चा में आए शोभिनव सत्य की कहानी सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं है। कैमरे के सामने आने से पहले वह फिल्म की टीम में सहायक निर्देशक के तौर पर काम कर रहे थे। जब मुख्य अभिनेता के बीमार पड़ने के बाद भूमिका के लिए उनकी तरफ देखा गया, तो उनकी पर्सनल लाइफस्टाइल भी चर्चा में आई।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - नथ, चांदबाली.. जोड़कर बना नीता अंबानी का ये शाही हार, सोनम कपूर भी पहन चुकी हैं
शोभिनव के बारे में खास बात यह है कि वह अपनी निजी जिंदगी को बहुत ज्यादा पब्लिक करना पसंद नहीं करते। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वह निजी जीवन की जानकारी सीमित रखना पसंद करते हैं और खुद को सात्विक जीवनशैली से जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करते।
2018 से शाकाहारी जीवन
शोभिनव की खान-पान की आदत भी उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा है। हालिया बातचीत में उन्होंने बताया कि वह करीब आठ वर्षों से शाकाहारी हैं। यानी 2018 के आसपास से उन्होंने मांसाहारी भोजन छोड़कर शाकाहारी जीवन अपनाया।
फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी बताया कि नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले कलाकार के लिए कुछ खास व्यक्तिगत आदतें महत्वपूर्ण थीं। उनके मुताबिक शोभिनव शाकाहारी हैं, शराब नहीं पीते और गाली-गलौज से दूर रहते हैं।
हनुमान जी में गहरी आस्था
शोभिनव की जिंदगी में आध्यात्मिकता कोई नई चीज नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वह 2009 से नीम करोली बाबा के भक्त रहे हैं और कई वर्षों से आध्यात्मिक जीवनशैली का पालन करते हैं। 2018 में उन्होंने मंगलवार का व्रत रखना भी शुरू किया और हनुमान जी की भक्ति से खुद को जोड़ा।
यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की भूमिका उनके लिए केवल अभिनय का काम नहीं रही। उन्होंने एक बातचीत में इस अनुभव को आध्यात्मिक नजरिए से भी देखा और कहा कि उन्हें लगा जैसे वह इस भूमिका के लिए पहले से तैयार किए जा रहे थे।
सादगी ही बन गई पहचान
शोभिनव की जीवनशैली को देखकर एक बात साफ नजर आती है, उनके लिए आध्यात्मिकता सिर्फ पर्दे पर निभाया गया किरदार नहीं है। शाकाहारी भोजन, नशे से दूरी, सात्विक जीवन और भक्ति उनके सार्वजनिक बयानों में बार-बार सामने आते हैं। हालांकि उनकी रोज की पूरी डाइट या निजी दिनचर्या के बारे में बहुत ज्यादा सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यानी कैमरे के सामने वह भले ही नीम करोली बाबा के रूप में नजर आए हों, लेकिन कैमरे के पीछे भी उनकी जिंदगी में सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक जुड़ाव की अपनी जगह है।
