Guru Ravidas ke Dohe: मन चंगा तो कठौती में गंगा, यहां देखें संत रविदास के दोहे अर्थ सहित, जानें संत रैदास जी का दोहा क्या है

Ravidas ji ke dohe in Hindi (रैदास के दोहे अर्थ सहित ), संत रविदास जी के दोहे अर्थ सहित: जनम जात मत पूछिए, का जात अरू पात। रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजात॥ - संत रविदास के इस दोहे का अर्थ है कि किसी की जाति नहीं पूछनी चाहिए क्योंकि संसार में कोई जाति−पाति नहीं है। सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं। यहाँ कोई जाति, बुरी जाति नहीं है।

संत रविदास के दोहे अर्थ सहित (Sant Guru Ravidas ji ke Dohe): भक्ति आंदोलन के महान संत रविदास जी की आज जयंती है। उन्होंने अपनी वाणी और दोहे से गुरु लाखों लोगों को प्रेरित करने का काम किया। उनके दोहे गुरु ग्रंथ साहिब में भी दर्ज हैं। रविदास जी ने जीवनभर जाति-पाति, ऊंच-नीच के भेदभाव को खारिज किया और सभी को ईश्वर के सामने समान बताया। गुरु रविदास जी के दोहों की सबसे खास बात ये थी कि वह सरल भाषा में गहरे सत्य कहते थे। आज संत रविदास जयंती पर आइए पढ़ें गुरु रविदास के प्रमुख दोहे और समझते हैं उसका मतलब:

Guru Ravidas ke Dohe

संत रविदास के दोहे अर्थ सहित

1. रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय।

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