Cheating And Love in Marriage: शादी के कई साल बाद अगर रिश्ते में अचानक तनाव नजर आने लगे तो क्या होता है? क्या पुराने प्यार की वजह से हर परेशानी को नजरअंदाज कर देना चाहिए? गोविंदा और सुनीता आहूजा की 39 साल की शादी को लेकर इन दिनों ऐसी ही बातें चर्चा में हैं। दोनों की निजी जिंदगी से जुड़े हालिया बयानों और कथित मतभेदों ने एक बार फिर उनकी शादी को सुर्खियों में ला दिया है। सुनीता ने कुछ महीनों पहले गोविंदा के कथित कई अफेयर्स का जिक्र करते हुए कहा था कि प्यार में इंसान को सब कुछ सहना चाहिए।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - प्रिंसेस ट्रीटमेंट या बस बेसिक रिस्पेक्ट? रिश्तों में कब छोटी चीजें बड़ी बन गईं, लड़कियां जरूर पढ़ें
वहीं, हाल की मीडिया रिपोर्ट्स में सुनीता के एक कथित अफेयर को लेकर नाराजगी जताने और गोविंदा की ओर से पब्लिक बयानों पर प्रतिक्रिया देने की बात सामने आई है। हालांकि, इन चर्चाओं को उनके निजी रिश्ते की पूरी सच्चाई मानना सही नहीं होगा। लेकिन इस पूरी कहानी से एक सवाल जरूर निकलता है, क्या प्यार का मतलब सच में सब कुछ सह लेना है?
शादी के इतने साल बाद रिश्ते में ऐसा मोड़ क्यों आता है?
लंबी शादी का मतलब यह नहीं कि दोनों लोग हमेशा एक ही तरह महसूस करेंगे। समय के साथ काम, परिवार, जिम्मेदारियां, पैसा, बच्चों की परवरिश और बदलती प्राथमिकताएं रिश्ते की तस्वीर बदल सकती हैं।
शुरुआत में जहां कपल एक-दूसरे के लिए ज्यादा समय निकालते हैं, वहीं कई साल बाद जिंदगी का बड़ा हिस्सा जिम्मेदारियों में चला जाता है। बातचीत कम हो जाए और शिकायतें जमा होती रहें, तो छोटी बात भी बड़ी लगने लगती है। इसलिए 20-30 साल पुरानी शादी को भी समय, बातचीत और इमोशनल कनेक्शन की जरूरत होती है।
शादी में धोखा क्यों
कभी रिश्ते में भावनात्मक दूरी, कभी नएपन की तलाश, कभी अपनी जरूरतों को गलत तरीके से पूरा करने की कोशिश और कभी सीमाओं की कमी इसके पीछे हो सकती है। कई लोग कहते हैं लव मैरिज में धोखा नहीं मिलता तो कई कहते हैं अरेंज मैरिज में.. हालांकि इसका भी कोई एक जवाब नहीं है। कुछ लोग रिश्ते में समस्या होने पर बातचीत करने के बजाय बाहर भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव तलाशने लगते हैं।
लेकिन वजह चाहे जो हो, धोखा देने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है जिसने रिश्ते की सीमा तोड़ी है। पार्टनर को दोष देना इसका सही समाधान नहीं है।
प्यार में सब सहना चाहिए.. क्या सच में?
सुनीता का पुराना बयान इसी वजह से चर्चा में आया। उन्होंने अपने अनुभव के संदर्भ में कहा था कि प्यार में सब कुछ सहना पड़ता है और गोविंदा के कई अफेयर्स का जिक्र भी किया था। लेकिन इस बात को हर रिश्ते का नियम मान लेना ठीक नहीं होगा।
प्यार में समझौता जरूरी हो सकता है। हर शादी में मतभेद आते हैं। लेकिन समझौते और लगातार चोट सहने में फर्क है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार झूठ बोलता है, विश्वास तोड़ता है या पार्टनर की भावनाओं को महत्व नहीं देता, तो केवल प्यार है कहकर सब कुछ सहते रहना जरूरी नहीं।
अगर शादी में ऐसा दौर आए तो क्या करें?
सबसे पहले समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय उसके बारे में खुलकर बात करना जरूरी है। आरोप लगाने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि असल परेशानी कहां से शुरू हुई। अगर भरोसा टूट गया है, तो उसे वापस बनाने के लिए दोनों तरफ से ईमानदार कोशिश चाहिए। सिर्फ एक व्यक्ति रिश्ते को नहीं संभाल सकता।
जरूरत पड़े तो कपल काउंसलिंग भी एक विकल्प हो सकता है। किसी भरोसेमंद विशेषज्ञ के साथ बातचीत कई बार उन बातों को सामने लाने में मदद करती है जिन्हें पार्टनर आपस में कह नहीं पाते।
लेकिन उनकी चर्चा से निकला सवाल हर रिश्ते के लिए अहम है, प्यार में साथ देना खूबसूरत है, लेकिन खुद को पूरी तरह खो देना प्यार की शर्त नहीं होनी चाहिए। एक मजबूत रिश्ता सिर्फ सालों से नहीं बनता। उसमें भरोसा, सम्मान, ईमानदारी, बातचीत और दोनों लोगों की इच्छा शामिल होती है। आखिरकार, प्यार ऐसा रिश्ता होना चाहिए जिसमें साथ रहने के साथ-साथ दोनों को सुना और सम्मानित महसूस हो।
