घी बनाने का तरीका (How to make fresh ghee) घी में सहजन का पत्ता: पुराने समय में दादी-नानी घी बनाते वक्त कई देसी चीजों का इस्तेमाल करती थीं। जिनमें पान के पत्ते से लेकर सहजन यानी मोरिंगा की पत्तियां भी शामिल होती थी। आज भी कई घरों में देसी घी (Ghee) इस पुराने देसी तरीकों से बनाया जाता है। आयुर्वेद में मोरिंगा को सुपरफूड कहा गया है, क्योंकि इसकी पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
घी बनाते समय मोरिंगा की कुछ ताजी पत्तियां डालने से घी की खुशबू, स्वाद और पौष्टिकता बढ़ जाती है। सहजन की पत्तियों में आयरन, कैल्शियम, विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जब ये पत्तियां गर्म घी में पकती हैं, तो इनके कई गुण घी में मिल जाते हैं। यही वजह है कि गांवों में आज भी कई लोग इस तरीके को अपनाते हैं।
घी में सहजन का पत्ता डालने से क्या होता है
खुशबू और स्वाद हो जाता है खास
सहजन की पत्तियां घी को हल्की हर्बल खुशबू देती हैं। इससे घी का स्वाद साधारण घी से अलग और ज्यादा देसी लगता है। कई लोग इसे दाल, रोटी और खिचड़ी के साथ खाना पसंद करते हैं।
लंबे समय तक खराब नहीं होता घी
माना जाता है कि मोरिंगा में मौजूद प्राकृतिक गुण घी को जल्दी खराब होने से बचाते हैं। इससे घी ज्यादा समय तक ताजा बना रह सकता है।
कैसे डालें मोरिंगा की पत्तियां?
जब मक्खन या मलाई से घी तैयार हो रहा हो और उसमें हल्का उबाल आने लगे। तब उसमें 4-5 साफ और सूखी मोरिंगा की पत्तियां डाल दें। कुछ मिनट पकाने के बाद पत्तियों को छानकर अलग कर लें। ऐसा करने से आपका घी एकदम ही स्वादिष्ट और दानेदार बन जाएगा।
घी में मोरिंगा की पत्ती के फायदे
आयुर्वेद के अनुसार सहजन पाचन सुधारने में मदद करता है। जब इसके गुण घी में मिलते हैं, तो यह पेट के लिए हल्का और फायदेमंद माना जाता है। मोरिंगा की पत्तियां पोषण से भरपूर होती हैं। इन्हें घी में डालने से घी के न्यूट्रिएंट तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है। यह शरीर को एनर्जी देने के साथ इम्यूनिटी मजबूत करने में भी मदद करता है।
