तपती गर्मी का सदियों पुराना साथी है शरबत, फारस से भारत तक कैसे पहुंचा शरबत का स्वाद

History Of Sharbat: जेठ के महीने में जब सूरज आग बरसा रहा होता है, तब एक गिलास ठंडा शरबत प्यास बुझाने के साथ ही शरीर को राहत और दिल को तसल्ली भी देता है। शा

History Of Sharbat: शरबत..यह नाम जुबां पर आते ही मानों चिलचिलाती गर्मी में बारिश की नर्फ फुहारें नसीब हो गई हों। दरअसल शरबत उस मिठास का नाम है जो तपती दोपहर में गले से उतरते ही मन तक ठंडक पहुंचा देती है। मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी, गुलाब की खुशबू, खस की हरियाली, बेल की सोंधी महक या आम का खट्टा-मीठा स्वाद..हर शरबत अपने आप में अमृत समान है।

Sharbat History, शरबत का इतिहास

शरबता का इतिहास

बचपन की गर्मियों में दादी के हाथ का बेल का शरबत, आंगन में रखे मटके का पानी और मेहमानों के स्वागत में परोसा गया गुलाब शरबत आज भी मन में ताजगी भर देता है। गुलाब का शरबत मानो फूलों की नरम खुशबू को घोलकर तैयार किया गया हो। वहीं खस का शरबत रेगिस्तान में चलती ठंडी हवा का एहसास कराता है। आम पन्ना अपनी हल्की खटास के साथ गर्मी की थकान चुरा लेता है, जबकि बेल का शरबत शरीर और मन दोनों को सुकून देता है।

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