Arshad Warsi Parenting Advice: हाल ही में अभिनेता अरशद वारसी ने माता-पिता और बच्चों के रिश्तों पर एक अहम बात कही है। बकौल अरशद वारसी हम अपने बच्चों को तब तक पसंद करते हैं जब तक कि उनकी कोई अपनी राय नहीं होती। जैसे ही उनके पास अपना दिमाग और राय आ जाती है, हम उनसे चिढ़ने लगते हैं। क्योंकि अब वे आपकी बात नहीं सुन रहे होते हैं।
पेरेंट्स को बहुत काम आएगी अरशद वारसी की ये सलाह
अरशद वारसी ने आगे कहा कि वास्तविकता यह है कि माता-पिता हमेशा बच्चों को सुधार नहीं रहे होते, बल्कि वे माता-पिता होने का अपना पावर दिखाने की कोशिश कर रहे होते हैं कि 'वे मेरी बात क्यों नहीं सुन रहे'। उन्होंने यह बच्चे का आपकी बात न मानना हमेशा उसकी 'नाफरमानी' या 'अशिष्टता' नहीं होती है?
पेरेंटिंग एक्सपर्ट भी अरशद वारसी की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। उनके मुताबिक बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वे अपनी पसंद-नापसंद और स्वतंत्र सोच विकसित करने लगते हैं। कई बार उनका 'ना' कहना केवल अपनी राय रखने का तरीका होता है। अगर हर बार उनकी बात को दबा दिया जाए, तो वे और ज्यादा विरोध करने लगते हैं।
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किशोरावस्था के दौरान यह व्यवहार कभी-कभी अपरिपक्व या गुस्से से भरा लग सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा आपका अनादर कर रहा है। बड़ा होने की प्रक्रिया में निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना शामिल है, और इस दौरान थोड़ा तनाव होना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चा अपनी राय रखने लगता है, नियमों पर सवाल उठाता है या माता-पिता से असहमत होता है, तो यह दर्शाता है कि उसके सोचने की क्षमता स्वतंत्र हो रही है। इससे पता चलता है कि उसका आत्म-सम्मान विकसित हो रहा है और वह घर में खुद को इतना सुरक्षित महसूस करता है कि अपनी बात खुलकर रख सके।
पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए। इससे वे खुद को सम्मानित महसूस करते हैं और संवाद बेहतर होता है। पेरेंट्स बच्चों को फैसले लेने की प्रक्रियाओं में भी शामिल करें। उन्हें उनके फैसलों के परिणामों को समझने में मदद करें और उम्र के हिसाब से सही विकल्प चुनने का मौका दें।
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एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि पेरेंटिंग का मतलब सिर्फ प्यार देना नहीं, स्पष्ट नियम बनाना भी है। बच्चे तभी सुरक्षित महसूस करते हैं जब उन्हें पता हो कि कौन-सी बात स्वीकार्य है और कौन-सी नहीं। लेकिन नियम बनाते समय उनका उद्देश्य समझाना भी जरूरी है।
तो अगर आपको भी लगे कि आपका बच्चा आपकी बातें नहीं मान रहा और हमेशा अपने मन की ही करता है तो बहुत ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। उसकी इस आदत को सकारात्मक रूप दें। आपका थोड़ा सा संयम और समझदारी बच्चों के साथ आपके रिश्ते को हमेशा प्रेम भरा रख सकते हैं।
