9/11 आतंकी हमला: जब तबाही और मौत के मलबे में खिले मोहब्बत के फूल

तबाही, चीख-पुकार और मौत के खौफनाक मंजर के बीच भी कुछ ऐसा भी घटा, जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत और प्रेम की लौ को कोई भी नफरत बुझा नहीं सकती।

11 सितंबर 2001- यह तारीख इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों से दर्ज है। इस तारीख ने इंसानियत के सीने पर ऐसा गहरा जख्म दिया जिसकी टीस आज भी महसूस होती है। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए भयानक आतंकवादी हमलों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। नीले, साफ आसमान में अचानक काले धुएं का एक ऐसा खौफनाक गुबार उठा, जिसने दिन के उजाले को निगल लिया। चारों तरफ सिर्फ चीखें थीं। कुछ अपनों को पुकारती हुईं, कुछ खौफ से कांपती हुईं।

911 Attack

9/11 हमले से पनपी थीं ये दो प्रेम कहानियां (AI Generated Image)

दूसरी तरफ इसी तबाही, चीख-पुकार और मौत के खौफनाक मंजर के बीच भी कुछ ऐसा भी घटा, जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत और प्रेम की लौ को कोई भी नफरत बुझा नहीं सकती। जी हां, उस दिन जब नफरत और आतंक अपनी सबसे भयानक शक्ल में सामने था, उसी वक्त प्यार के फूल भी खिल रहे थे। त्रासदी के उस अंधेरे दौर से निकली दो ऐसी ही दास्तानें आज भी यकीन दिलाती हैं कि सबसे बुरे दौर में भी प्यार जीत सकता है।

End of Feed