Aaj Ki Shayari: बता तेरी रज़ा क्या है.., कर्म को खुदा से भी बड़ा क्यों मानता है इकबाल का यह शेर

Aaj Ki Shayari (आज की शायरी): यह शेर अल्लामा इकबाल की फिलॉसफी और आत्मबोध की सोच की अमर मिसाल है। इसके मायने जीवन, कर्म और आत्मसम्मान के साथ जुड़े हैं। शेर में इस्तेमाल लफ्ज खुदी का मतलब यहां अपने भीतर छिपी हुई आत्मशक्ति, आत्मविश्वास, विवेक और चेतना से है।

Shayari of The Day: अल्लामा इकबाल उर्दू और फारसी के महान शायर, दार्शनिक और विचारक थे। उन्हें शायर-ए-मशरिक़ भी कहा जाता था। इकबाल की शायरी भावनाओं की अभिव्यक्ति मात्र नहीं थी। उनकी कलम से निकले शेरों में आत्मचेतना, कर्म, आत्मसम्मान और जागृति का संदेश होता था। इकबाल की शायरी इथनी बुलंद थी कि पढ़ने भर से लोगों के हौसलों को नई उड़ान मिल जाती। उनका एक ऐसा ही मशहूर शेर है:

Allama Iqbal

आज की शायरी (Aaj Ki Shayari)

"ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

End of Feed