Electric Train Voltage: देश की ज्यादातर आबादी ट्रेन से सफर करती है, जो यात्रा को सुगम और सस्ता बनाती है। समय के साथ-साथ ट्रेन उन्नत होती गईं। कोयले के इंजन से लेकर इलेक्ट्रिक इंजन तक का रेलवे ने सफर तय किया है, लेकिन क्या आपको पता है कि ट्रेन का संचालन करने के लिए कितनी बिजली की आवश्यकता होती है?
भारतीय रेल
इंजन को कितनी बिजली चाहिए?
ट्रेन के सुगम संचालन के लिए हाई पॉवर के वोल्टेज की जरूरत होती है। ऐसे में ट्रेन के ऊपर लगे पेंटोग्राफ नामक यंत्र के जरिए इंजन तक बिजली पहुंचती है। इंजन को 25KV बिजली की जरूरत होती है तभी वह फर्राटा मारते हुए ट्रैक पर दौड़ती है। हालांकि, ट्रेनें डायरेक्ट करंट (DC) पर चलती हैं।
25KV लाइन से बिजली को ट्रेन में इस्तेमाल करने के लिए DC में बदला जाता है। आप लोगों ने रेलवे स्टेशन के किनारे में बिजली के सब स्टेशन जरूर देखे होंगे। इन सब स्टेशन्स को पॉवर ग्रिड से सप्लाई मिलती है। ट्रेन के परिचालन के लिए हाई टेंशन लाइन की जरूरत होती है और यही लाइन इंजर को पर्याप्त बिजली मुहैया करा पाती है।
हाई वोल्टेज लाइन
11000/33000 वोल्टेज लाइन का क्या मतलब है?
आप लोग यह तो जानते ही होंगे कि बिजली को मापने की इकाई वोल्ट है और इससे बड़ी इकाई किलो वोल्ट होती है, जिसे हम KV भी कहते हैं। कई बार कुछ स्थानों पर 11KV, 33KV, 66KV ऐसे शब्द लिखे होते हैं। आखिर इसका क्या मतलब है? हजार वोल्ट का एक किलो वोल्ट या एक केवी होता है। ऐसे में 11000 वोल्ट को 11KV भी लिखा जाता है।
11 किलो वोल्ट और 33 किलो वोल्ट को हाई टेंशन लाइन कहेंगे। दरअसल, एक किलो वोल्ट से ज्यादा और 33 किलो वोल्ट से कम की लाइन को हाई टेंशन लाइन कहा जाता है, जबकि 33 किलो वोल्ट से ऊपर की लाइन एक्स्ट्रा हाई टेंशन और सुपर हाई टेंशन लाइन होती है। वहीं, एक किलो वोल्ट से कम की लाइन लो टेंशन लाइन होती है। ऐसा नहीं है कि हाई टेंशन लाइन हमेशा 11 के गुणक में ही हो। भारतीय रेलवे 25 किलो वोल्ट की लाइन का इस्तेमाल करती है।
