क्या आपने कभी सोचा है कि जब लगभग 13.8 अरब साल पहले हमारे ब्रह्मांड का जन्म हुआ था, तब इसके शुरुआती 5 मिनटों में क्या हुआ था? वैज्ञानिक दशकों से इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। अब, एक अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों की टीम ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने लार्ज बिनोक्युलर टेलीस्कोप (Large Binocular Telescope) की मदद से ब्रह्मांड के शुरुआती पांच मिनट में बने शुरुआती हीलियम (Primordial Helium) की मात्रा को 0.5% की अभूतपूर्व सटीकता के साथ मापा है। यह पिछली किसी भी माप से 3 गुना अधिक सटीक है। 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' (The Astrophysical Journal) में छपे पांच शोध पत्रों में इस खोज को भौतिकी और खगोल विज्ञान की दुनिया में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
ब्रह्मांड के शुरुआती 5 मिनटों का सबसे सटीक केमिकल फिंगरप्रिंट (Newsroom Verified AI Image)
हीलियम क्या है और यह खोज खास क्यों है?
मान लीजिए कि आप एक बहुत पुरानी किसी डिश की रेसिपी का पता लगाना चाहते हैं जो कई साल पहले बनाई गई थी। अगर उस रेसिपी में बाद में अलग-अलग शेफ ने अपने मनमुताबिक सामग्री मिला दी हो, तो असली स्वाद का पता लगाना मुश्किल होगा। लेकिन अगर आपको कहीं किसी जगह सुरक्षित हालत में वो पहली डिश मिल जाए, तो आप उसकी एक-एक सामग्री का सटीक अंदाजा लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों के साथ भी कुछ ऐसी ही चुनौती थी। बिग बैंग के ठीक बाद जब ब्रह्मांड अत्यधिक गर्म और डेंस था, तब सबसे पहले हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के तत्व बने। लेकिन बाद में बने तारों ने अपने अंदर की रासायनिक प्रक्रियाओं से नए हीलियम बनाकर इस शुरुआती मिश्रण को बदल दिया।
इसीलिए, वैज्ञानिकों ने आम आकाशगंगाओं का अध्ययन करने के बजाय 15 ऐसी दूरस्थ और छोटी आकाशगंगाओं (Pristine Galaxies) को चुना, जिनमें समय के साथ बहुत कम रासायनिक बदलाव हुए थे। ये 15 आकाशगंगाएं अंतरिक्ष के ऐसे "टाइम कैप्सूल" की तरह काम करती हैं, जो आज भी 13.8 अरब साल पुराने ब्रह्मांड के शुरुआती स्वरूप को सुरक्षित रखे हुए हैं।
बिग बैंग के बाद कैसे बना हीलियम
इस खोज से क्या-क्या नई बातें सामने आई हैं?
अभूतपूर्व 0.5% की सटीकता:
मिनेसोटा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इवान स्किलमैन (Evan Skillman) ने इसे अपने 40 साल के करियर की सबसे बड़ी खोजों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मूलभूत अंक है जो हमें सीधे तौर पर बताता है कि ब्रह्मांड के पहले 5 मिनट में स्थितियां कैसी थीं।
स्टैंडर्ड मॉडल ऑफ फिजिक्स का टेस्ट:
भौतिकी का 'स्टैंडर्ड मॉडल' हमें यह बताता है कि हमारा ब्रह्मांड किन मूलभूत कणों से मिलकर बना है। शुरुआती हीलियम की सटीक मात्रा का पता चलने से वैज्ञानिक अब यह आसानी से जांच सकते हैं कि भौतिकी के ये स्थापित नियम ब्रह्मांड के बिल्कुल शुरुआती पलों में सही काम कर रहे थे या नहीं।
न्यूट्रिनो के परिवारों की गिनती:
न्यूट्रिनो बहुत ही हल्के और रहस्यमयी उप-परमाणु कण (Subatomic Particles) होते हैं। इस नई सटीक माप की मदद से वैज्ञानिक शुरुआती ब्रह्मांड में मौजूद न्यूट्रिनो परिवारों की संख्या का सटीक हिसाब लगाने में सफल रहे हैं।
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कैसे हासिल हुई इतनी बड़ी कामयाबी?
इस शोध के लिए अमेरिका के ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित एक बेहद उन्नत उपकरण- MODS स्पेक्ट्रोग्राफ (MODS Spectrographs) का इस्तेमाल किया गया। इसे डिजाइन करने और बनाने में करीब 12 साल का लंबा समय लगा था।
इस उपकरण की मदद से वैज्ञानिकों ने हीलियम की 10 से अधिक स्पेक्ट्रल लाइनों और हाइड्रोजन की 15 लाइनों का एक साथ गहन विश्लेषण किया। एक साथ इतनी बारीक तरंगों का अध्ययन करने से मापन में होने वाली छोटी से छोटी मानवीय व तकनीकी गलतियों को सुधारा जा सका, जिससे 0.5% जैसी दुर्लभ सटीकता हासिल हो सकी।
हमारे अस्तित्व के मूल का पता लगाने की दिशा में बड़ा कदम
बिग बैंग थ्योरी के मुख्य रूप से तीन बड़े प्रमाण माने जाते हैं। एक ये कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है, दूसरा कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन (CMB) और तीसरा शुरुआती समय में बने हीलियम और ड्यूटेरियम जैसे तत्वों की मात्रा। पहले दो प्रमाणों पर काफी काम हुआ था, लेकिन शुरुआती हीलियम की सटीक मात्रा को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से असमंजस में थे। मिनेसोटा, ओहायो स्टेट, नॉर्थवेस्टर्न, यूसी सांता क्रूज़ और मैक्सिको की नेशनल यूनिवर्सिटी (UNAM) समेत दुनिया भर के शीर्ष शोध संस्थानों के इस संयुक्त प्रयास ने अब ब्रह्मांड की उत्पत्ति और इसके भौतिक नियमों को समझने का एक नया और अचूक जरिया दे दिया है।
