मच्छर कई बार हमें चुपके काट लेते हैं और फिर लाल रंग चकते दे जाते हैं। इसके काटने पर थोड़ी-बहुत परेशानी होती है, तो कई बार इसके काटने से चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया और जीका वायरस जैसे बीमारियों के भी लोग शिकार हो जाते हैं। लेकिन, कई बार ऐसा भी होता है कि हम सो रहे होते हैं और ये तेजी से आकर कान के पास भिनभिनाने लगते हैं। जिसके बाद नींद तो खराब होती ही है साथी ही ये सवाल भी मन में आता है कि आखिर ये मच्छर कान के पास आकर ही क्यों आवाज करते हैं ? ऐसे में अगर आपके मन में भी यह सवाल आता है तो आज हम आपको इसकी वजह बताएंगे।
इसलिए कान के पास भिनभिनाते हैं मच्छर
मच्छरों के कान के पास भिनभिनाने की वजह
मच्छरों के कान के पास भिनभिनाने के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि ये जरूरी नहीं मच्छर कान के पास ही भनभना रहे हों। दरअसल, अगर वह दूर भी होते हैं तो हमें लगता है कि वह हमारे कान के पास ही आकर आवाज कर रहे हैं। इसकी वजह है कि मच्छरों के पंख बहुत छोटे आकार के होते हैं और उन्हें उड़ने के लिए अपने पंखों हवा में तेजी से फड़फड़ाना होता है।
मच्छरों के नेचर है भिनभिनाना
वह जब भी उड़ते हैं तो उनके पंखों को तेजी से फड़फड़ाते हैं। मच्छरों का अपने पंखों तो फड़फड़ना उनकी नेचर और मजबूरी है। लेकिन, उनके भिनभिनाने की रफ्तार इतनी तेजी होती है कि उनकी फ्रीक्वेंसी से कानों में वाइब्रेशन्स महसूस होता है।
एक सेकेंड में 250 बार फड़फड़ाते हैं पंख
एक्सपर्ट्स के अनुसार एक मच्छर अपने पंखों को प्रति सेकंड 250 बार हिलाता है। इसी के जरिए वो एक-दूसरे से बात कर पाते हैं। अमेरिका के एक रिसर्च में पाया गया कि मच्छर प्रजनन के लिए भी ऐसी आवाज निकालते हैं। जिससे नर मच्छर मादा मच्छर को लुभाते हैं।
