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चांद पर रहना कितना मुश्किल? कैसे खुद को संभाल पाएंगे एस्ट्रोनॉट, बस्ती बसाने के लिए तैयार हो रहा खास प्लान!

Moon Mission: नासा का आर्टेमिस-II मिशन भविष्य के मिशनों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है, जहां वैज्ञानिकों की तैयारी चांद पर बस्ती बसाने की है और इसके लिए नासा 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक खर्च कर सकता है।

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चांद पर बेस बनाने की तैयारी में नासा (फोटो साभार: AI)
Edited by: Anurag Gupta
Updated Apr 8, 2026, 17:48 IST

Moon Mission: चांद पर काफी कुछ लिखा और पढ़ा गया है। विज्ञानी जगत से लेकर महबूब की तलाश की बात हो तो चांद पर नजर जरूर ठहकती है, लेकिन आज सिर्फ चांद की बात करेंगे, जहां पर अब उतरने की नहीं, बल्कि बस्ती बसाने की योजनाएं तैयार हो रही हैं। इसके लिए मौजूदा आर्टेमिस II मिशन काफी मददगार साबित हो रहा है। इस मिशन के तहत ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार चार एस्ट्रोनॉट चंदा मामा की परिक्रमा कर रहे हैं और अध्ययन के लिए डेटा एकत्रित कर रहे हैं।

बस्ती बसाने की तैयारी

अपोलो युग के बाद एस्ट्रोनॉट की दिलचस्पी चंदा मामा पर काफी बढ़ी है। तभी आर्टेमिस II मिशन के बाद भी वैज्ञानिक/खगोलविद ठहरने नहीं वाले हैं। तभी तो वह भविष्य में वहां लंबे समय तक रहने और काम करने की तैयारी में हैं। ऐसे में सबसे दिलचस्प सवाल यही उठता है कि चंद्रमा की सतह पर लंबे समय तक रहना वास्तव में कैसा होगा? तो चलिए विस्तार से इसके बारे में जानते हैं।

10 दिनों वाला आर्टेमिस II मिशन

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन एक अप्रैल, 2026 को लॉन्च हुआ था। इस मिशन के तहत ओरियन अंतरिक्ष यान में मौजूद 4 एस्ट्रेनॉट चंदा मामा की परिक्रमा करते हुए उसका अध्ययन कर रहे हैं। इस मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जीवन-समर्थन प्रणाली, नेविगेशन, ताप सुरक्षा और डीप-स्पेस ऑपरेशन इंसानों के साथ सुरक्षित रूप से काम कर सकते हैं।

इन शुरुआती मिशनों से अलावा, नासा की दीर्घकालिक योजना एक बार की लैंडिंग से कहीं ज्यादा व्यापक है। नासा ने चंद्रमा की सतह पर एक बेस बनाने के लिए 20 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है, जिसका मकसद लंबे समय तक चंद्र सतह पर बने रहना है।

चंद्रमा पर क्या हैं चुनौतियां?

चंदा मामा अब दूर नहीं... आने वालों सालों में यह महज एक कहावत नहीं रह जाएगी, बल्कि वैज्ञानिकों की मेहनत की बदौलत यह मुमकिन हो सकेगा, लेकिन चंद्रमा में रहना पृथ्वी की तरह आसान नहीं होने वाला है। चंद्रमा के वातावरण के चलते मनुष्यों के शरीर का हर एक सिस्टम प्रभावित हो सकता है। वहां का वातावरण कई तरह के खतरों से भरा है।

क्या-क्या हैं चुनौतियां

  • पृथ्वी की तुलना में बेहद कम गुरुत्वाकर्षण
  • कॉस्मिक रेडिएशन का प्रभाव
  • बेहद ठंडा और गर्म तापमान
  • जहरीली चंद्र धूल
  • अकेलापन और मानसिक दबाव

पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड की सुरक्षा के बिना एस्ट्रोनॉट पर रेडिएशन के संपर्क में आने का खतरा बना रहता है, जो डीएनए, इम्यून सिस्टम, दिल और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। कम गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर में खून, ऑक्सीजन और तरल पदार्थों का प्रवाह भी बदल जाता है, जिससे लंबे समय में न्यूरोलॉजिकल और कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं हो सकती हैं।

साइंस अलर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मानव शरीर एक जुड़ा हुआ तंत्र है जिसमें दिल, दिमाग, मांसपेशियां, हड्डियां, इम्यून सिस्टम इत्यादि एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। ऐसे में अंतरिक्ष में एक छोटे से बदलाव का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं और तुरंत नजर नहीं आतीं, लेकिन बाद में गंभीर बन सकती हैं।

Earth From Space

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इन खतरों से खुद को कैसे बचाएं?

व्यायाम

अंतररराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) की तरह, एस्ट्रोनॉट रोजाना करीब 2 घंटे व्यायाम कर सकते हैं ताकि मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत रहें।

डाइट पर दें ध्यान

डाइट पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। एक अच्छी और संतुलित डाइट शरीर की मजबूती, इम्यून सिस्टम और रेडिएशन से लड़ने की क्षमता को बेहतर बनाता है।

आर्टिफिशियल ग्रेविटी

सेंट्रीफ्यूज जैसी तकनीक से कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण पैदा करने पर रिसर्च चल रही है। साफ शब्दों में कहें तो इस तकनीक की मदद से एस्ट्रोनॉट को गुरुत्वाकर्षण बल के संपर्क में ला सकते हैं, जिससे हृदय और तंत्रिका तंत्र को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।

रेडिएशन से सुरक्षा

चंद्रमा की मिट्टी (रेगोलिथ) से बने स्ट्रक्चर अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन से बचा सकते हैं।

हेल्थ मॉनिटरिंग

वियरेबल सेंसर और डेटा एनालिटिक्स से शरीर के बदलावों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

कैसे दिखेगा आसमान

भविष्य में चंद्रमा पर रहना अद्भुत हो सकता है। वहां से आसमान काला नजर आएगा। अगर वैज्ञानिक चंद्रमा पर इंसानों को सुरक्षित और स्वस्थ रख पाए तो इसकी बदौलत मंगल जैसे बड़े मिशनों की ओर बढ़ा जा सकेगा। यूं तो वैज्ञानिक अन्य ग्रहों पर लगातार जिंदगी और पानी की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन मंगल उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। तभी तो मंगल से जुड़ी खोजें लगातार हो रही हैं।

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