हर साल भाद्रपद माह यानि अगस्त-सितंबर के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी पावन पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथी तय होती है ऐसे में हर साल यह बदलती रहती है। भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक ये दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण और प्रेम को प्रकट करने का पर्व भी है।
जन्माष्टमी पूजा सामग्री:
श्रीकृष्ण की मूर्ति या बाल गोपाल (लड्डू गोपाल), झूला (पालना) और सिंहासन, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल), तुलसी के पत्ते, फल और मेवे, धूप, दीपक, कपूर, चंदन और रोली, माला (फूलों की और तुलसी की), पूजा थाली, घंटी, कलश, नये वस्त्र और वस्त्राभूषण।
जन्माष्टमी पूजा विधि:
स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर उन्हें नए वस्त्र पहनाकर झूले पर विराजमान करें। दीपक जलाएं, धूप लगाएं और फूल अर्पित करें। तुलसी दल, मक्खन-मिश्री और माखन चढ़ाएं। श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करने के साथ ही आरती करें और अंत में प्रसाद वितरित करें।
जन्माष्टमी के मंत्र:
1- हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥