G20 के संयुक्त घोषणापत्र पर मान क्यों गए रूस पर सख्त तेवर दिखाने वाले पश्चिमी देश?

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Sep 11, 2023, 09:17 AM IST

Joint Declaration Of G20 Summit : वैश्विक चुनौतियों एवं समस्याओं को निपटने में संयुक्त राष्ट्र सहित अतंरराष्ट्रीय संस्थाओं पर लगातार सवाल उठे हैं। बीते वर्षों में जी-20 की प्रासंगिकता सवालों के घेरे में रही है। ऐसे में जी-20 नहीं चाहता था कि साझा संयुक्त घोषणापत्र जारी करने में समूह के सदस्य देशों में बिखराव दिखे।

G20 Summit 2023 : जी-20 सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए दुनिया भर में भारत की प्रशंसा हो रही है। खासकर दिल्ली घोषणापत्र पर सदस्य देशों की आम सहमति को मोदी सरकार के एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस सम्मेलन पर रूस-यूक्रेन युद्ध की छाया थी और पश्चिमी देश इस बात का संकेत दे चुके थे कि संयुक्त घोषणापत्र में वह रूस के खिलाफ सख्त तेवर एवं कड़े शब्दों का इस्तेमाल करेंगे लेकिन भारत की कूटनीति एवं सदस्य देशों में उसकी पकड़ ने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया।

Joint Declaration Of G 20

जी-20 सम्मेलन के घोषणापत्र पर बनी सहमति।

संयुक्त घोषणापत्र भारत की कूटनीतिक जीत

संयुक्त घोषणापत्र से रूस 'संतुष्ट' है, यह भारत के लिए बड़ी जीत है क्योंकि भारत की अध्यक्षता में जी-20 सम्मेलन से यदि मास्को के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल होता तो यह रूस-भारत संबंधों के लिए अच्छा नहीं माना जाता। संयुक्त घोषणापत्र पर यूक्रेन ने भले ही अपनी 'निराशा' जाहिर की हो लेकिन बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के परिप्रेक्ष्य में सदस्य देशों ने भी माना कि संयुक्त घोषणापत्र की भाषा समायनुकूल एवं प्रासंगिक है।

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