Monsoon 2026: सूर्य की तपिश के बीच मानसून राहत तो देता है, लेकिन जब मानसून की रफ्तार अचानक धीमी हो जाए तो बेतहाशा निराशा होती है। इस बार कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। मानूसन ने 3 दिनों की देरी के बाद 4 जून को केरल के रास्ते दस्तक तो दी, लेकिन अब तेलंगाना और महाराष्ट्र के पास आकर अटक सा गया है। जिसकी वजह से उत्तर-मध्य भारत के 7 राज्य इस समय भीषण गर्मी और सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
मानसून का बिगड़ा खेल (फोटो साभार: AI)
सामान्य से कम बारिश हुई दर्ज
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 1 से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 38 से 41 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई। सबसे बदतर हालात गुजरात और महाराष्ट्र में बने हुए हैं। इंतजार है तो सिर्फ मानसून के रफ्तार पकड़ने का। अभी तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में जून में सामान्य से अधिक बारिश देखने को मिली, जबकि राजस्थान को देश का सबसे शुष्क राज्य माना जाता है। वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र बारिश की भीषण कमी का सामना कर रहा है, जहां पर हर साल मानसून का व्यापक असर दिखाई देता रहा है।
मानसून की इस मौजूदा स्थिति को लेकर किसान, जल प्रबंधन विशेषज्ञ और मौसम वैज्ञानिक सभी हैरान हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर राज्यस्थान में झमाझम बारिश कैसे हो रही है और अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं पर निर्भर महाराष्ट्र का हाल क्यों उलटा है?
मौसम का बदला मिजाज
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका जवाब जमीन से हजारों मीटर ऊपर वायुमंडल में चल रही जटिल मौसमी गतिविधियों में छिपा है। इस वर्ष मानसून का सामान्य ढांचा बिखरा हुआ नजर आ रहा है और देश में वर्षा का वितरण बेहद असमान हो गया है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट् के मुताबिक, आमतौर पर जून के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से पश्चिमी तट पर आगे बढ़ता है। अरब सागर से नमी लेकर आने वाली हवाएं सबसे पहले केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में अच्छी बारिश कराती हैं और फिर मध्य भारत की ओर बढ़ती हैं। इसके विपरीत राजस्थान में आमतौर पर जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में व्यापक मानसूनी बारिश पहुंचती है।
आसमान में छाए काले बादल (फाइल फोटो)
मुंबई में मानसून की बेहद धीमी शुरुआत
लेकिन इस बार मानसून अपनी सामान्य लय में नहीं दिख रहा। जून की शुरुआत से ही उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश अधिक हुई है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और मध्य भारत के बड़े हिस्से सामान्य से अधिक शुष्क बने हुए हैं। मुंबई में भी कई वर्षों के मुकाबले मानसून की बेहद धीमी शुरुआत दर्ज की गई है और मौसम वैज्ञानिक, राज्य के कई जलाशयों के जलस्तर पर अपनी पैनी निगाह बनाए हुए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) हैं। ये मौसम प्रणालियां भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होकर भारत तक पहुंचती हैं और सामान्यतः सर्दियों में उत्तर भारत तथा हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का कारण बनती हैं। हालांकि, इस साल इनका प्रभाव जून तक बना हुआ है।
तो इस वजह से राजस्थान में रिकॉर्ड बारिश हुई दर्ज
जब ये पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत पहुंचा तो अरब सागर से आने वाली नमी के साथ मिलकर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश को बढ़ावा दिया। परिणामस्वरूप वह नमी, जो सामान्यतः मध्य भारत में मानसूनी बारिश कराती है, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों की ओर मुड़ गई। इसी कारण राजस्थान के कई जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।
राजस्थान में झमाझम बारिश
दूसरी ओर, अरब सागर वाला मानसून अपेक्षाकृत कमजोर बना हुआ है। सामान्य रूप से दक्षिणी हिंद महासागर से आने वाली शक्तिशाली हवाएं अरब सागर के माध्यम से भारत तक भारी मात्रा में नमी पहुंचाती हैं। इस प्रक्रिया में सोमाली जेट नामक तेज वायु प्रवाह अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इस वर्ष यह प्रणाली पूरी ताकत से सक्रिय नहीं हो सकी।
उपग्रह चित्रों में भी पश्चिमी तट के बड़े हिस्से में गहरे बादलों की कमी देखी गई है। कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश जरूर हुई, लेकिन महाराष्ट्र में व्यापक वर्षा कराने वाले संगठित बादल तंत्र विकसित नहीं हो पाए। नतीजतन राज्य में बारिश सामान्य से कम बनी हुई है।
क्या है मानसून ट्रफ?
एक अन्य महत्वपूर्ण कारण मानसून ट्रफ की स्थिति है। मानसून ट्रफ निम्न दबाव का एक लंबा क्षेत्र होता है, जो बारिश लाने वाली प्रणालियों को दिशा देता है। सामान्य परिस्थितियों में यह मध्य भारत के करीब मौजूद रहता है, जिससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से यह ट्रफ बार-बार उत्तर की ओर खिसक गया। इसके कारण बारिश का केंद्र भी उत्तर भारत और राजस्थान की ओर शिफ्ट हो गया।
इसके अलावा मध्य भारत में शुष्क हवा की बार-बार घुसपैठ भी समस्या को बढ़ा रही है। वायुमंडल की मध्य परतों में मौजूद शुष्क हवा बादलों के विकास को रोकती है और वर्षा की संभावना कम कर देती है। यही वजह है कि महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों की कमी बनी रही।
किसानी पर दिख सकता है असर
मानसून की मौजूदा स्थितियों की वजह से किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। देश के प्रमुख कृषि राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में गन्ना, कपास, सोयाबीन और दालों की बड़ी पैमाने पर खेती होती है। ऐसे में अगर समय से बारिश नहीं हुई और सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं, राजस्थान में ज्यादा बारिश के चलते बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
