पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक संकट हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है। पार्टी के विधायकों और लोकसभा सांसदों की बगावत के बाद अब राज्यसभा में भी TMC ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। गुरुवार को TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन की सदस्यता और पार्टी संगठन से इस्तीफा दे दिया। पिछले चार दिनों के भीतर इस्तीफा देने वाले वे तीसरे TMC राज्यसभा सांसद हैं। उनसे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी पाला बदल चुके हैं। इस इस्तीफे के तुरंत बाद बराइक ने दिल्ली में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे से मुलाकात की और स्पष्ट संकेत दिया कि उनका भविष्य अब पश्चिम बंगाल के वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ है।
चाय बागान से राज्यसभा तक पहुंचने वाले प्रकाश बराइक कौन हैं (AI Image)
इस्तीफे के बाद बोले 'अब जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कहेंगे, वही करूंगा'
45 वर्षीय प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया। इस्तीफे के बाद मीडिया से बात करते हुए बराइक ने स्पष्ट किया कि उन पर भाजपा का कोई दबाव नहीं था, बल्कि उन्होंने बंगाल की जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया है। बराइक ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा करते हुए कहा कि "बंगाल की जनता ने साफ जनादेश दिया है और TMC को नकार दिया है। उत्तर बंगाल में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। भविष्य में मैं वही कदम उठाऊंगा जो बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मुझे करने के लिए कहेंगे। मैं किसी भी निजी बातचीत का खुलासा नहीं करना चाहता, लेकिन अब मैं राज्य के विकास के लिए उनके निर्देशों के अनुसार काम करूंगा।"
चाय बागान से राज्यसभा तक: कौन हैं प्रकाश चिक बराइक?
प्रकाश चिक बराइक पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के रहने वाले हैं और वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक प्रमुख आदिवासी चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। सिलीगुड़ी के सूर्य सेन कॉलेज से बी.कॉम स्नातक करने वाले बराइक ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत अलीपुरद्वार जिले से की थी। चाय पत्ती के कारोबार और चाय बागानों से जुड़े ट्रेड यूनियन आंदोलन के जरिए एक मजदूर नेता के रूप में बराइक ने अपनी शुरुआती पहचान बनाई। बराइक की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है, उनके पिता कृष्णा चिक बराइक अलीपुरद्वार जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं।
ग्राम पंचायत से देश के उच्च सदन का सफर
TMC के भीतर प्रकाश चिक बराइक का राजनीतिक सफर बेहद चौंकाने वाला रहा है। साल 2018 में TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं के समर्थन से उन्होंने कुमारग्राम ग्राम पंचायत का अपना पहला चुनाव लड़ा और उसमें जीत हासिल की। इसके बाद संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब अलीपुरद्वार सीट पर TMC को करारी हार का सामना करना पड़ा और जिले में संगठन कमजोर होने लगा, तब पार्टी नेतृत्व ने गिरावट को रोकने के लिए 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बराइक को अलीपुरद्वार का जिला को-ऑर्डिनेटर नियुक्त कर दिया।
हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC जिले की एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष नेतृत्व का उन पर भरोसा कायम रहा और उन्हें अलीपुरद्वार का जिला अध्यक्ष बना दिया गया। बराइक के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ अगस्त 2023 में आया, जब पंचायत चुनाव की मतगणना से ठीक एक दिन पहले पार्टी हाईकमान ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए उन्हें पश्चिम बंगाल से सीधे राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया और वे निर्विरोध चुनकर देश के उच्च सदन पहुंच गए।
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संसद से लेकर विधानसभा तक चौतरफा बगावत, संकट में ममता
प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में TMC की ताकत 13 सांसदों से घटकर अब केवल 10 रह गई है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि अगले एक हफ्ते के भीतर पार्टी के तीन और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। TMC के भीतर यह उथल-पुथल केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। पिछले हफ्ते ही TMC के 80 में से 58 विधायकों ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में आधिकारिक विधायक दल से नाता तोड़ लिया और विधानसभा में मुख्य विपक्षी समूह के तौर पर मान्यता हासिल कर ली। बागी गुट का दावा है कि अब यह संख्या बढ़कर 64 विधायकों तक पहुंच चुकी है। लोकसभा के भीतर भी TMC के 28 सांसदों में से 19 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर रखा है। काकोली घोष , सायोनी घोष और माला रॉय की अगुवाई में बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग की है।
28 साल पहले जिस बगावत से बनी थी TMC, आज उसी दौर में खड़ी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक पतन की पटकथा लिखी जाने लगी थी। आज से 28 साल पहले (1998 में) ममता बनर्जी ने जिस तरह कांग्रेस से बगावत कर और संघर्ष की बदौलत कम्युनिस्टों के अजेय गढ़ को ढहाकर TMC की स्थापना की थी, आज उनकी पार्टी खुद उसी इतिहास के सबसे बड़े बिखराव और अस्तित्व की लड़ाई के दौर से गुजर रही है।
