Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के हुए एक साल हो गए हैं। हालांकि यह रुका नहीं है। पाकिस्तान को साफ और स्पष्ट संकेत है कि भविष्य में उसकी तरफ से यदि कोई गुस्ताखी होती है तो ऑपरेशन सिंदूर 2.0 शुरू हो जाएगा और इस बार उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि चार दिनों के संघर्ष में भारतीय सेना ने दिखा दिया कि वह क्या कर सकती है। बिना LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार किए वह उसकी ऐसी हालत कर देगी इस बारे में वह सपने में भी नहीं सोचा होगा। सात मई से 10 मई तक यानी चार दिनों तक चले इस संघर्ष में भारत की इस आधुनिक सैन्य ताकत को पाकिस्तान ने गहराई से महसूस तो किया ही, दुनिया भी भारतीय हथियारों, तकनीक और युद्ध कौशल देखकर दंग रह गई। भारतीय हथियारों ने अपना लोहा दुनिया में मनवा लिया।
आज के युद्ध हाईटेक और अनमैंड हैं
दरअसल, पाकिस्तान पर भारत की यह जीत भारतीय सेना की उस काबिलियत की जीत है जिसे उसने हाल के दशकों में विकसित किया है। आज के युद्ध पारंपरिक तरीके से नहीं लड़े जा रहे। उसके तौर-तरीके बदल गए हैं। आज के युद्ध हाईटेक और अनमैंड हैं। युद्ध पहले की तरह अब मैदान में नहीं बल्कि साइबर, स्पेस की दुनिया में लड़े जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वार हो रहा है। युद्ध नरेटिव के स्तर पर लड़े जा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान अमेरिका इजराइल की जंग में युद्ध के बदले हुए रूप को पूरी दुनिया ने देखा है। अब जंग दूर से और हवाई हमलों से लड़ी जा रही है। आगे भविष्य के युद्ध इसी तरीके से लड़े जाएंगे।
कुछ टेक्नॉलजी हमारी अपनी हैं तो कुछ बाहर हैं
तकनीक लगातार बदल और उन्नत हो रही है। हथियारों में भी इनका बढ़ चढ़कर इस्तेमाल हो रहा है। यानी जिसके पास तकनीकी रूप से ज्यादा उन्नत और सटीक हथियार होंगे, दुश्मन पर वह ज्यादा प्रभावी तरीके से हमला करेगा और उस पर बढ़त बनाकर रखेगा। रक्षा क्षेत्र की अगर बात करें तो भारतीय सेना लगातार नई और उन्नत तकनीक वाले हथियारों को अपने जखीरे में शामिल करती आई है, फिर भी तकनीक के स्तर पर आत्मनिर्भरता के उस स्तर पर वह नहीं पहुंच पाई है जहां यूएस, रूस और फ्रांस हैं। कुछ टेक्नॉलजी हमारी अपनी हैं तो कुछ टेक्नॉलजी बाहर हैं तो कुछ को रिसर्च एवं डेवलपमेंट के जरिए विसकित करने की जरूरत है। इन सबके बीच दुश्मन की सैन्य क्षमता, उसके हथियार, उसकी टेक्नॉलजी और उसकी तैयारी को देखते हुए युद्ध के सभी मोर्चों पर भारतीय सेना ने खुद को तैयार किया है। दुश्मन की ताकत का लगातार समीक्षा करते हुए उसने अपनी युद्ध रणनीति बनाई है।
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PAK को भारतीय मिसाइलों की भनक नहीं लगी
चार दिनों के इस संघर्ष में भारतीय सेना ने युद्ध के हर मोर्चे पर पाकिस्तान को शिकस्त दी। सात मई को भारतीय वायु सेना ने जब पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ढाचों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं तो उसे भनक तक नहीं लगी। यह तब था जब पाकिस्तान के पास उन्नत रडार, वायु सेना और चीन के एयर डिफेंस सिस्टम थे। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने हमारे नागरिक एवं सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने के लिए ड्रोन एवं मिसाइलों से हमले किए लेकिन हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने इन सभी हमलों को इंटरसेप्ट कर उन्हें मार गिराया। यह हमारी जीत है।
सीजफायर के लिए पाक का यूएस के पास जाना, यह भारत की जीत
इसके बाद 10 मई को भारतीय वायु सेना ने जब पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर मिसाइलों से हमले किए तो वह एक भी मिसाइल इंटरसेप्ट नहीं कर पाया। हमारी मिसाइलें उसकी एयरस्ट्रिप पर गिरीं, हैंगर्स और जमीन पर खड़े एयरक्राफ्ट्स को नुकसान पहुंचाया, उसका कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और रडार बर्बाद कर दिए लेकिन पाकिस्तानी सेना को हवा तक नहीं लग पाई। यह भारतीय सेना की जीत है। यही नहीं मार से बचने के लिए पाकिस्तान भागकर सऊदी अरब और अमेरिका के पास गया और हमने किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की यह भारत की जीत है। पाकिस्तान के डीजीएमओ का फोन करना और सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाना यह भारतीय सेना की जीत है।
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हर युद्ध कोई न कोई सीख देता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' से भी सबक मिले हैं। जाहिर है कि इन सबकों से सीखते हुए भारतीय सेना अपनी तैयारी को और पुख्ता एवं प्रहार को और घातक बनाएगी। कुल मिलाकर ऑपरेशन सिंदूर की यह जीत बेजोड़ और बेमिसाल है।
