कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी के बयान के बाद पेगासस का जिन्न फिर बाहर आ गया है। इसने एक बार फिर पुरना विवाद सामने ला खड़ा किया है जब सरकार पर पेगासस के जरिए विपक्षी नेताओं के फोन की जासूसी का आरोप लगा था। कैंब्रिज में राहुल ने कहा कि पेगासस स्पाईवेयर से उनके फोन की जासूसी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान सावधान रहने को कहा था।
पेगासस का जिन्न फिर बाहर आ गया है
पेगासस एक बार फिर सुर्खियों में
राहुल गांधी के आरोप के बाद पेगासस एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछली बार भारत में इसके बारे में 2019 में सुना था जब कुछ व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं, जिनमें पत्रकार और कार्यकर्ता शामिल थे, उन्हें व्हाट्सएप से संदेश मिला था कि उनके फोन की पेगासस से जासूसी हो रही है। तकरीबन हर महीने इस बारें में खबरें आती हैं कि इसका इस्तेमाल करके किसी फोन को कैसे हैक किया गया। इसे लेकर गार्जियन में विस्तार से खबर भी छपी थी। एनएसओ ग्रुप ने गार्जियन को दिए बयान में इसकी रिपोर्ट- 'द पेगासस प्रोजेक्ट' को गलत आधार पर एनएसओ ग्रुप को बदनाम करने की कोशिश बताया। कंपनी ने ब्रिटिश समाचार वेबसाइट को दिए अपने लंबे बयान में कहा कि एनएसओ की अपने ग्राहकों के डेटा तक पहुंच नहीं होती है।
क्या है पेगासस?
पेगासस एक इजराइली कंपनी एनएसओ (NSO) ग्रुप द्वारा विकसित एक स्पाईवेयर है, जो किसी साइबर हथियार के तौर पर काम करता है। यह पहली बार 2016 में सुर्खियों में आया था जब एक संदिग्ध संदेश मिलने के बाद एक अरब एक्टिविस्ट को शक हुआ। माना जा रहा था कि पेगासस आईफोन यूजर्स को टारगेट कर रहा है। इसका खुलासा होने के कई दिनों बाद एपल (Apple) ने iOS का एक अपडेट वर्जन जारी किया, और कथित तौर पर उन सुरक्षा खामियों को दूर किया जिसका इस्तेमाल पेगासस फोन हैक करने के लिए कर रहा था।
फेसबुक ने पेगासस के खिलाफ दर्ज कराया था केस
हालांकि, एक साल बाद सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पाया कि पेगासस एंड्रॉइड फोन में छेड़छाड़ करने में सक्षम था। फिर 2019 में फेसबुक ने पेगासस बनाने के लिए एनएसओ ग्रुप के खिलाफ केस दर्ज कराया। फेसबुक के सुरक्षा शोधकर्ता अपने सिस्टम में पेगासस का पता रहे थे और उन्होंने पाया कि इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भारत में कई पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की जासूसी के लिए किया गया था। इसी दौर में वॉट्सऐप ने प्रभावित भारतीय यूजर्स को एक मैसेज के जरिए इसकी जानकारी दी। पेगासस स्पाइवेयर को अब तक का सबसे परिष्कृत फोन हैकिंग टूल कहा गया है और क्योंकि इसका इतनी बार इस्तेमाल किया गया है कि हम अभी भी इससे प्रभावित हुए लोगों की कहानियां सुन रहे हैं।पेगासस फोन कैसे हैक करता है?
पेगासस से फोन हैकिंग बेहद आसान है और फोन यूजर को पता भी नहीं चलता कि उसके डिवाइस से छेड़छाड़ शुरू हो गई है। एक बार जब कोई हैकर किसी फोन की पहचान कर लेता है, जिसे वह हैक करना चाहता है, तो वे ऐसे यूजर को एक वेबसाइट लिंक भेजते हैं। अगर उपयोगकर्ता उस पर क्लिक करता है, तो फोन पर पेगासस इंस्टॉल हो जाता है। व्हाट्सऐप जैसे ऐप्स के जरिए की जाने वाली वॉयस कॉल्स में एक सिक्योरिटी बग के जरिए भी इसे इंस्टॉल किया जाता है। दरअसर, यह तरीका इतना मजबूत और गोपनीय है कि यूजर को केवल एक मिस्ड कॉल देकर फोन पर पेगासस इंस्टॉल किया जा सकता है। एक बार सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाने के बाद यह कॉल लॉग को भी हटा देता है ताकि यूजर को मिस्ड कॉल के बारे में पता न चले।
क्या-क्या कर सकता है पेगासस?
फोन पर एक बार पेगासस इंस्टॉल होने के बाद यह यूजर की जासूसी शुरू कर देता है। यहां तक कि व्हाट्सएप के माध्यम से किए गए एन्क्रिप्टेड चैट तक भी पेगासस की आसान पहुंच में होते हैं। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने पाया है कि पेगासस मैसेज पढ़ सकता है, कॉल ट्रैक कर सकता है, ऐप्स के भीतर यूजर की गतिविधि ट्रैक कर सकता है, लोकेशन डेटा जमा कर सकता है, फोन में वीडियो कैमरे एक्सेस कर सकता है और अपने माइक्रोफोन के जरिए बातचीत सुन भी सकता है।
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