Ankita Bhandari Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को भले ही कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले से जुड़े अनसुलझे सवाल, कथित 'VIP' की पहचान का मुद्दा और पीड़ित परिवार का संघर्ष आज भी देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में बना हुआ है। हाल ही में दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के धरने और राजनीतिक मुलाकातों के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर अंकिता भंडारी केस क्या है, इसमें अब तक क्या कानूनी कार्रवाई हुई है और पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें क्या हैं।
क्या है अंकिता भंडारी मर्डर केस
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई। इसके कुछ दिनों बाद 24 सितंबर 2022 को उसका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया।
इस जघन्य हत्याकांड में रिजॉर्ट के मालिक और तत्कालीन भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद बीजेपी ने कार्रवाई करते हुए विनोद आर्य और उनके बेटे अंकित आर्य को पार्टी से निलंबित कर दिया था। लंबी कानूनी लड़ाई और सुनवाई के बाद, मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई, और वे वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं।
'VIP' कौन था और ऑडियो-वीडियो वायरल होने का मामला
शुरुआत से ही इस केस में एक रहस्य 'VIP' को लेकर बना हुआ है। पुलिस जांच के दौरान तत्कालीन डीजीपी ने बताया था कि अंकिता ने अपने एक दोस्त को चैट में बताया था कि उसे रिजॉर्ट के किसी 'VIP' मेहमान को ‘विशेष सेवाएं’ देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। परिवार और जनता लगातार यह सवाल उठाती रही कि वह वीआईपी कौन था?
दिसंबर 2025 में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच बातचीत के कुछ कथित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन वीडियो में 'गट्टू' नाम का जिक्र आया, जिसे बाद में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और पूर्व महामंत्री अजय कुमार से जोड़ा गया। दुष्यंत गौतम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि धूमिल करने की गहरी साजिश बताया। उन्होंने जनवरी 2026 में देहरादून के डालनवाला थाने में FIR दर्ज कराई और दिल्ली हाईकोर्ट से मानहानि के मुकदमे में अंतरिम राहत मिली। पुलिस और SIT के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान रिसॉर्ट में ठहरने वाले हर पहलू को परखा गया, लेकिन किसी 'VIP' की मौजूदगी का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
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क्या हैं पीड़ित परिवार की मांगें
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी का मानना है कि इस मामले की तह तक जांच नहीं हुई है और कई कड़ियां अब भी गायब हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
VIP की वास्तविक पहचान: परिवार का सवाल है कि अंकिता की चैट में जिस VIP के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मांगने का जिक्र था, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
वायरल वीडियो और नए नामों की जांच: उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के वीडियो-ऑडियो में सामने आए नामों की गहराई से पूछताछ और जांच की जाए।
CBI जांच की निगरानी: परिवार ने मांग की थी कि मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड या मौजूदा जज की निगरानी में हो। हालांकि फरवरी 2026 में CBI जांच की घोषणा तो हुई, लेकिन परिवार का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें जांच की प्रगति की संतोषजनक जानकारी नहीं मिली है।
पुलकित आर्य के फोन की रिकवरी: परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद (18-19 सितंबर 2022) मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के असल फोन की सही से जांच या रिकवरी नहीं की गई थी, क्योंकि उसने बाद में नया फोन ले लिया था।
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इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता (चित्र साभार: Facebook/@yogitaofficial)
हालिया घटनाक्रम: राज्यपाल नियुक्ति पर विवाद और दिल्ली में धरना
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 12 अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया। इस नियुक्ति के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस और पीड़ित परिवार ने रोष जताया। अंकिता के माता-पिता ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि जब तक इस मामले की पूरी और निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल जैसी संवैधानिक जिम्मेदारी न सौंपी जाए।
न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता ने नई दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने वहां पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव न्याय दिलाने का भरोसा दिया। आज देर रात धरने पर बैठे माता-पिता और कुछ कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और तकरीबन एक घंटे बाद रिहा कर दिया। धरने की जगह खाली हो जाने के बाद माता-पिता ने अपने विरोध जारी रखने की बात कही है। अंकिता की मां ने कहा है कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं हो जाती, हम अपने विरोध पर अडिग रहेंगे... अगर हमें यहां बैठने की अनुमति नहीं दी गई, तो हम अपने घरों में भूख हड़ताल पर बैठेंगे। वहीं अंकिता के पिता ने कहा, "हम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हैं। सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए। अगर इसे रद्द नहीं किया गया, तो पूरे देश के लोग सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
