मोदी सरकार के कार्यकाल के 12 साल पूरे हो चुके हैं। इन सालों में सरकार ने कई अहम फैसले लिए जिसकी चर्चा देश से लेकर दुनियाभर में होती है। सरकार ने कई ऐसे याजोनाओं की शुरुआत की, जिसका असर देश के हर नागरिकों पर पड़ा।
आइए जानें पीएम मोदी सरकार में लिए पांच अहम फैसले। AI IMAGE
सरकार के फैसलों ने न केवल दशकों पुराने विवादों का अंत किया, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को भी हमेशा के लिए बदल दिया। यह महज नीतियां नहीं, बल्कि नए भारत का वो रोडमैप हैं जिसने देश की आंतरिक और बाहरी दिशा तय की है। आइए जानते हैं मोदी सरकार द्वारा लिए गए पांच बड़े फैसले, जिसकी आज भी खूब चर्चा होती है।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का खात्मा
अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने एक एतिहासिक और बेहद साहसिक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के 'अनुच्छेद 370' और '35A' को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। इसके साथ ही सूबे को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया।
इस फैसले ने 'एक देश, एक विधान, एक प्रधान' के संकल्प को जमीन पर उतारा। इससे घाटी में दशकों पुराना अलगाववादी नेटवर्क ध्वस्त हुआ, भारतीय संविधान पूरी तरह लागू हुआ और लद्दाख व जम्मू-कश्मीर में सीधे केंद्र के जरिए विकास की नई बयार शुरू हुई।
डिजिटल इंडिया और यूपीआई (UPI) क्रांति
मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 'जनधन खाते, आधार और मोबाइल' (JAM Trinity) को आपस में जोड़ा और UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को लॉन्च किया।
आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान करने वाला देश बन चुका है, जहां सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक कैशलेस ट्रांजैक्शन हो रहा है। इस तकनीक ने 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे गरीबों के खातों में भेजकर भ्रष्टाचार और बिचौलियों के राज को जड़ से खत्म कर दिया।
नए क्रिमिनल लॉ (BNS)
मोदी सरकार ने गुलामी के प्रतीकों को मिटाने और न्याय व्यवस्था को तेज करने के लिए अंग्रेजों के जमाने के 150 साल से भी पुराने कानूनों (IPC, CrPC और एविडेंस एक्ट) को इतिहास के पन्नों में समेट दिया। इनकी जगह तीन नए कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए।
नए कानूनों का पूरा फोकस अब 'दंड देने' के बजाय 'न्याय देने' पर है। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त सजा, राजद्रोह की जगह देशद्रोह का कानून, और अदालती कार्यवाही में फॉरेंसिक व डिजिटल सबूतों को अनिवार्य कर न्याय प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी व तेज बनाया गया है।
जीएसटी (GST) लागू करना, 'एक देश, एक टैक्स'
1 जुलाई 2017 की आधी रात से देश की कर व्यवस्था में आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार करते हुए 'गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स' (GST) लागू किया गया। इसने देश में लागू वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे 17 से ज्यादा अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) के जाल को खत्म कर दिया।
शुरुआत में व्यापार जगत के सामने आई चुनौतियों के बाद, जीएसटी ने पूरे भारत को एक एकीकृत साझा बाजार (Single Market) बना दिया। आज हर महीने रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन हो रहा है, जिससे टैक्स चोरी रुकी है और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में भारत की रैंकिंग सुधरी है।
महिला आरक्षण बिल, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'
दशकों से संसद में लटके महिला आरक्षण बिल को मोदी सरकार ने संसद के विशेष सत्र में ऐतिहासिक सर्वसम्मति के साथ पास कराया। इस कानून के तहत लोकसभा और देश की सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया।
यह भारत के इतिहास में महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा नीतिगत फैसला है। इसके जरिए देश की नीति-निर्माण और राजनीति के शीर्ष स्तर पर महिलाओं की भागीदारी और उनका प्रतिनिधित्व कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे सामाजिक संतुलन में बड़ा बदलाव आएगा।
गौरतलब है कि इन पांच फैसलों के अलावा अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए नाविगकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करना, और कोरोना काल से चल रही दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त राशन योजना (80 करोड़ लाभार्थियों के लिए) भी मोदी सरकार के उन कदमों में शामिल हैं, जिन्होंने देश की राजनीति और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है।
