पश्चिम बंगाल सीएम ममता ने TMC प्रतिनिधिमंडल और SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के साथ दिल्ली में CEC से मुलाकात की और विरोध स्वरूप काले कपड़े पहने प्रतिनिधिमंडल में ममता बनर्जी, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और SIR प्रक्रिया से कथित तौर पर प्रभावित 12 परिवार के सदस्य शामिल थे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो: ANI Video Grab)
जिसमें तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और प्रभावित परिवारों ने काले कपड़े पहनकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। तृणमूल के एक मीडिया बयान के अनुसार, 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय के अंदर गया।
पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी दिल्ली में चुनाव आयोग के ऑफिस से बाहर आकर बोलीं- 'अगर आपको SIR करना ही था, तो आपको चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर सही प्लानिंग के साथ करना चाहिए था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। असम में आपकी BJP सरकार है। आपने असम में SIR नहीं किया, लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में किया। आपने हमारे साथ क्या किया? आपने 58 लाख लोगों को हटा दिया। यहां बहुत ज़्यादा गड़बड़ी और गलत मैपिंग है..पहले बच्चे घरों में पैदा होते थे, अस्पतालों में नहीं...
SIR पर मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा था पत्र
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिर से पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने एसआईआर को लेकर अपनाई जा रही एसओपी को अपनाने के तरीकों पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि पूरे देश में लागू एक समान अधिनियम और नियमों द्वारा संचालित प्रक्रिया को राज्यों में अलग-अलग तरीके से लागू किया जा रहा है। बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इससे पहले भी कई बार चुनाव आयुक्त को इस प्रक्रिया की बाबत पत्र लिख चुकी हैं।
पत्र में ममता बनर्जी ने क्या लिखा था?
ममता ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि पूरे देश में एक समान अधिनियम और नियमों के तहत संचालित प्रक्रिया को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरीके से लागू किया जा रहा है, जबकि प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और पद्धति में एकरूपता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। वर्तमान में चल रहे एसआईआर के तहत तार्किक विसंगति से जुड़े मामलों की सुनवाई और निपटान की प्रक्रिया,बैक-एंड सत्यापन एवं निस्तारण के लिए सूक्ष्म पर्यवेक्षकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती,साथ ही परिवार रजिस्टर और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की स्वीकार्यता को लेकर पश्चिम बंगाल में अपनाई जा रही प्रक्रिया अन्य राज्यों में प्रचलित प्रक्रियाओं से पूरी तरह भिन्न है।
