चेहरा या संगठन, ममता के सामने बीजेपी की दुविधा; कैसे पार पाएगी भगवा पार्टी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी एक बड़े रणनीतिक सवाल से जूझ रही है। और वह सवाल है क्या वह ममता बनर्जी के मुकाबले किसी मुख्यमंत्री चेहरे को आगे बढ़ाए या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ‘सामूहिक टीम मॉडल’ के सहारे चुनावी मैदान में उतरे। फिलहाल पार्टी के संकेत साफ हैं कि बंगाल में किसी एक नेता को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व की छवि के सहारे चुनाव लड़ा जाएगा।

बीजेपी का तर्क है कि दिल्ली जैसे राज्यों में बिना मुख्यमंत्री चेहरे के भी चुनाव जीते जा चुके हैं और पार्टी की विचारधारा, संगठन तथा प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा ही सबसे बड़ा चुनावी हथियार है। लेकिन बंगाल की सियासत इस मॉडल के लिए सबसे कठिन परीक्षा मानी जा रही है। यहां ममता बनर्जी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि पूरी राजनीति का केंद्र हैं एक ऐसा चेहरा, जो सत्ता, संगठन और जनभावनाओं तीनों को साधे हुए है।

Mamata Banerjee PM Modi

नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी।

सुवेंदु अधिकारी से लेकर सुकांत मजूमदार तक

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को अनौपचारिक रूप से मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था। नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद वह बीजेपी के सबसे आक्रामक और चर्चित नेता बने और पार्टी ने 77 सीटें हासिल कीं। सुवेंदु अधिकारी को जमीनी संगठन, हिंदुत्व नैरेटिव और आक्रामक राजनीति में मजबूत माना जाता है।

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