Weather Update: महाराष्ट्र के कई हिस्सों में गुरुवार को अचानक मौसम ने करवट ली। मुंबई सहित कई जगहों पर गरज के साथ बारिश हुई और यहां तक कि ओले भी गिरे। मुंबई और आसपास के इलाकों में भी कुछ बारिश हुई, जिससे चिलचिलाती गर्मी से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग ने कहा कि अभी कुछ दिन और ऐसे ही हालात बने रह सकते हैं। विभाग ने अगले पांच दिनों तक शहर में आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि के साथ बेमौसम बारिश होने का अनुमान जताया है।
मौसम में अचानक बदलाव से नुकसान (File photo)
मुंबई का तापमान 40 डिग्री, फिर अचानक बारिश
पिछले हफ्ते ही मुंबई का तापमान लगभग 40 डिग्री पर पहुंच गया था। मौसम अब नाटकीय रूप से बदल गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पैदा हो गई हैं। लोग खराब वायु गुणवत्ता और इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों के बारे में चिंतित हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, अचानक मौसम में बदलाव से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यह बदलाव चिंता बढ़ा सकता है, तनाव बढ़ा सकता है और लोगों सामान्य से अधिक थका हुआ महसूस कर सकते हैं।
गर्म जलवायु से ठंडी जलवायु में बदलाव से मौसमी अस्थमा हो सकता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। विशेष रूप से सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों को परेशानी हो सकती है। मौसम में बदलाव भी सामान्य फ्लू के छोटे प्रकोप का कारण बन सकता है। इस बार फ्लू पिछले सीजन की तुलना में अधिक दिक्कतें पैदा कर रहा है, और इससे अधिक लोगों के संक्रमित होने की संभावना है। हवा की खराब गुणवत्ता के कारण कई लोग सिरदर्द, गले में खराश, आंखों में खुजली और अत्यधिक थकान की शिकायत कर रहे हैं।
मौसम में अचानक बदलाव से नुकसान
महाराष्ट्र ही नहीं देश के कई और हिस्सों में भी मौसम में अचानक बदलाव हो रहा है। दिल्ली एनसीआर में भी दो दिनों से मौसम में बदलाव हुआ है। आसमान में कभी बादल छा जाते हैं तो कभी तेज धूप निकलती है। अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना भी जताई गई है। इससे गर्मी से राहत जरूर मिल रही है, लेकिन तबियत खराब होने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने भी इस बार लू चलने की संभावना जताई साथ ही फसलों को लेकर भी चेताया है कि ओलावृष्टि से इस पर असर पड़ सकता है। मौसम में इस तरह के लगातार बदलाव से स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है।
बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
भारत के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 10 दिनों में मध्य, उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में प्रमुख उत्पादक राज्यों में अधिक बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है यह उत्पादन को कम कर सकता है और खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) को ऊपर उठा सकता है, जिसे सरकार और केंद्रीय बैंक नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। गेहूं के उत्पादन में गिरावट से नई दिल्ली के लिए इन्वेंट्री को फिर से भरना मुश्किल हो सकता है, जबकि रेपसीड का कम उत्पादन दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल खरीदार को पाम तेल, सोया तेल और सूरजमुखी के तेल के आयात को बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकता है।
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