MEA on Hormuz Crisis: विदेश मंत्रालय ने आज ईरान संकट के मद्देनजर भारतीयों की सुरक्षा, गैस सप्लाई और होर्मुज को लेकर कई बातें साफ कीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे कई भारतीय नागरिक, करीब 204 लोग भूमि सीमा के रास्ते ईरान से अजरबैजान जाने में सफल रहे हैं और वहां से वापस लौटेंगे। उनमें से कई लौट चुके हैं और अन्य अगले कुछ दिनों में लौट आएंगे। हम अजरबैजान सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने भूमि सीमा के रास्ते ईरान से भारतीय नागरिकों की वापसी में सहयोग दिया।
ब्रिटेन ने बुलाई होर्मुज पर चर्चा
इसके साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत के लिए भारत समेत कई देशों को आमंत्रित किया है। हमारी ओर से विदेश सचिव आज शाम बैठक में शामिल हो रहे हैं।
एलपीजी और एलएनजी लदे जहाजों पर ईरान से बात
उन्होंने आगे कहा, हम ईरान और अन्य देशों के साथ संपर्क में हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे जहाजों, जिनमें एलपीजी, एलएनजी और अन्य उत्पाद हैं, उनके लिए निर्बाध और सुरक्षित पारगमन हो सके। पिछले कई दिनों से चल रही बातचीत के परिणामस्वरूप, छह भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुके हैं, और हम संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
पड़ोसी देशों को दी मदद
पड़ोसी देशों को मदद के सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा, बांग्लादेश के संबंध में हम 2007 से उन्हें ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए हैं... हमने हाल ही में श्रीलंका के अनुरोध पर उन्हें 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भी आपूर्ति किए हैं। नेपाल और भूटान के साथ हमारा निरंतर संपर्क बना हुआ है। मालदीव सरकार ने भी अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए हमसे संपर्क किया है। इन अनुरोधों की जांच हमारी अपनी उपलब्धता और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
UNIFIL में लगभग 600 भारतीय सैनिक
वहीं, रणधीर जायसवाल ने कहा, संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (UNIFIL) में हमारे लगभग 600 भारतीय सैनिक तैनात हैं। हमारे शांतिरक्षा अभियान कई दशकों से चल रहे हैं। हम संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देश हैं, और वैश्विक शांति और सुरक्षा में हमारे शांतिरक्षकों के योगदान को सराहा गया है। हमने एक बयान भी जारी किया था, जिसे आपने देखा होगा, जिसमें यूएनआईएफआईएल पर हुए हालिया हमलों की निंदा की गई थी, जिनमें दुर्भाग्यवश कई सैनिकों ने अपनी जान गंवाई... एक बार फिर, हम इस बात पर जोर देना चाहेंगे कि संयुक्त राष्ट्र मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, और हमारे शांतिरक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
